CM Helicopter Breakdown : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हेलिकॉप्टर में एक बार फिर तकनीकी खराबी आ गई। पिछले डेढ़ महीने में यह दूसरी घटना है, जब सीएम के दौरे को लेकर तय की गई हवाई यात्रा अचानक रद्द करनी पड़ी। सोमवार 11 अगस्त को मुख्यमंत्री को सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दौरे पर रवाना होना था, लेकिन उड़ान भरने से ठीक पहले पुलिस लाइन हेलीपैड में हेलिकॉप्टर में तकनीकी गड़बड़ी सामने आ गई।

हेलिकॉप्टर में गड़बड़ी की जानकारी मिलते ही टेक्निकल टीम ने मौके पर ही करीब 45 मिनट तक मेंटनेंस का काम किया, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया। इस दौरान मुख्यमंत्री हेलीपैड परिसर स्थित वेटिंग रूम में इंतजार करते रहे। बाद में तय किया गया कि मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से ही अपने दौरे के लिए रवाना होंगे।

कार्यक्रम बिगड़ा, पर दौरा नहीं रुका
मुख्यमंत्री के साथ यात्रा कर रहे थे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और संगठन महामंत्री अजय जामवाल। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, मुख्यमंत्री को सुबह 11:25 बजे सीएम हाउस से निकलकर हेलीपैड पहुंचना था और 12:15 बजे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला मुख्यालय में पहुंचकर वहां के 17 कार्यक्रमों में शामिल होना था। लेकिन हेलिकॉप्टर की तकनीकी खराबी के चलते दौरे की टाइमिंग पूरी तरह बिगड़ गई।
सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद, हेलिकॉप्टर की खराबी को लेकर सीएम सिक्योरिटी और जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान अब तक सामने नहीं आया है। लेकिन लगातार हो रही तकनीकी खामियों ने सुरक्षा मानकों और विमानन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले भी खराब हो चुका है हेलिकॉप्टर
यह पहली बार नहीं है जब सीएम का हवाई सफर तकनीकी वजहों से प्रभावित हुआ है। 21 जून 2025 को जशपुर दौरे के दौरान भी हेलिकॉप्टर में खराबी आई थी। इससे पहले 16 अक्टूबर 2024 को बस्तर दौरे के समय हेलिकॉप्टर तकनीकी गड़बड़ी के कारण उड़ान नहीं भर सका था। उस वक्त झारखंड से हेलिकॉप्टर बुलाकर दौरे की व्यवस्था की गई थी।
6 घंटे में 17 कार्यक्रम
मुख्यमंत्री साय सोमवार को दोपहर 12:15 बजे से शाम 6 बजे तक सारंगढ़-बिलाईगढ़ में होने वाले 17 कार्यक्रमों में शामिल होने वाले थे। समय की बाध्यता को देखते हुए उन्होंने हवाई मार्ग की बजाय तुरंत सड़क मार्ग से यात्रा का निर्णय लिया।
लगातार हो रही हेलिकॉप्टर खराबी की घटनाएं अब महज संयोग नहीं लगतीं, बल्कि यह प्रशासनिक सतर्कता और तकनीकी निगरानी की कमी की ओर संकेत करती हैं। मुख्यमंत्री जैसे संवेदनशील पद पर बैठे व्यक्ति की यात्रा में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। आने वाले दिनों में उम्मीद की जा रही है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार और विमानन विभाग आवश्यक कदम उठाएंगे।











