CM Vishnudev Sai rescue order : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नेपाल में फंसे राज्य के पर्यटकों की सुरक्षा और सकुशल वापसी को लेकर त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि इन नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने लिया त्वरित संज्ञान
मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार नेपाल में फंसे पर्यटकों के परिजनों की चिंता को समझती है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार से लगातार संपर्क में है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सरकार इस कठिन परिस्थिति में हर एक नागरिक के साथ खड़ी है।

भारत सरकार से समन्वय जारी
राज्य सरकार की ओर से विदेश मंत्रालय और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के साथ निरंतर समन्वय किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे नेपाल में मौजूद पर्यटकों की लोकेशन, स्वास्थ्य स्थिति और जरूरतों की तत्काल जानकारी जुटाएं और जल्द से जल्द उन्हें सुरक्षित भारत लाने की योजना पर काम करें।

परिजनों में चिंता, सरकार दे रही भरोसा
नेपाल में मौजूदा हालात को देखते हुए छत्तीसगढ़ के पर्यटकों के परिजनों में स्वाभाविक रूप से चिंता का माहौल है। लेकिन मुख्यमंत्री के सक्रिय हस्तक्षेप के बाद अब राज्य के नागरिकों में भरोसा जगा है कि सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि फंसे हुए सभी लोगों की वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं।
हर स्तर पर सहायता के निर्देश
मुख्यमंत्री साय ने राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग और नोडल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे हर प्रभावित परिवार से संपर्क बनाए रखें और उन्हें समय-समय पर सही जानकारी प्रदान करें। इसके साथ ही हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय कर दिए गए हैं, ताकि जरूरतमंद लोग सरकार से सीधे संवाद कर सकें।
नेपाल में फंसे छत्तीसगढ़ के पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा की गई त्वरित पहल से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। राज्य और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से जल्द ही सभी पर्यटकों की सुरक्षित वापसी संभव होगी। यह घटना प्रशासनिक तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण बन सकती है।











