Coimbatore serial blasts : 14 फरवरी 1998 को तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर में उस वक्त अफरातफरी मच गई थी जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की रैली से ठीक पहले सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन भयावह हमलों में कुल 58 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 231 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। धमाकों का उद्देश्य आडवाणी को निशाना बनाना था, लेकिन संयोगवश वह बाल-बाल बच गए।
पुलिस के अनुसार, कुल 14 अलग-अलग स्थानों पर विस्फोट किए गए थे। रैली स्थल के आसपास के इलाके को भी निशाना बनाया गया था। बम उस स्थान के पास लगाया गया था, जहां आडवाणी भाषण देने वाले थे। यह साफ संकेत था कि हमलावरों का मुख्य उद्देश्य भाजपा नेता की हत्या करना था। घटनास्थल पर मचे हाहाकार के बाद पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
तीन दशकों तक फरार रहने के बाद आखिरकार पुलिस ने इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता टेलर राजा उर्फ सादिक को गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार को उसे छत्तीसगढ़ से पकड़ा गया। इस गिरफ्तारी ने एक लंबे समय से अधूरी पड़ी जांच को नई दिशा दी है। पुलिस अब आरोपी को कड़ी सुरक्षा में तमिलनाडु ला रही है, जहां उससे पूछताछ की जाएगी और उसे अदालत में पेश किया जाएगा।
टेलर राजा उर्फ सादिक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन ‘अल उम्माह’ का सक्रिय सदस्य था। यही संगठन 1998 के कोयंबटूर धमाकों के लिए जिम्मेदार था। अल उम्माह के संस्थापक समेत कुल 17 लोगों को इस मामले में पहले ही अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है और वे सभी आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं। राजा इन सभी के साथ मिलकर हमले की साजिश रचने वालों में प्रमुख था।
तमिलनाडु पुलिस के सूत्रों ने जानकारी दी है कि आरोपी को विशेष सुरक्षा के साथ कोयंबटूर लाया जा रहा है। राज्य की पुलिस ने 1998 में हमले के बाद विशेष जांच टीम गठित की थी, जो लंबे समय तक इस मामले के पीछे के चेहरों को बेनकाब करने में जुटी रही। सादिक की गिरफ्तारी से पुलिस को उम्मीद है कि हमले की कई और परतें अब खुल सकेंगी।
घटना उस समय हुई थी जब देश में आम चुनाव का माहौल था। भाजपा के स्टार प्रचारक आडवाणी को लक्ष्य बनाना इस बात की ओर इशारा करता है कि हमलावरों की मंशा देश में राजनीतिक अस्थिरता और भय का वातावरण फैलाना था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यदि आडवाणी उस समय मंच पर पहुंच गए होते, तो देश को एक बड़ा राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ सकता था।
टेलर राजा की गिरफ्तारी के बाद अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां उसके नेटवर्क की छानबीन में जुट गई हैं। यह आशंका भी जताई जा रही है कि इतने सालों तक वह देश के भीतर या बाहर किन संगठनों के साथ संपर्क में रहा। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से न केवल पुराने मामले में न्याय मिलेगा, बल्कि वर्तमान में सक्रिय आतंकी नेटवर्क पर भी बड़ी चोट की जा सकेगी।
कोयंबटूर धमाकों के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से न केवल पीड़ित परिवारों को न्याय की एक नई उम्मीद मिली है, बल्कि यह देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 27 साल पुराने इस मामले में हुई यह गिरफ्तारी यह भी दर्शाती है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और कोई भी अपराधी हमेशा के लिए कानून से नहीं बच सकता।
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