Columbia University Protest : अमेरिका के प्रतिष्ठित कोलंबिया विश्वविद्यालय में फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने वाले कम से कम 80 छात्रों को निष्कासित कर दिया गया है। साथ ही इनमें से कई की डिग्रियां भी वापस ले ली गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्रवाई को अनुशासन और नियमों के उल्लंघन का परिणाम बताया है। बताया जा रहा है कि इन छात्रों ने बटलर लाइब्रेरी और परिसर के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए थे।
कोलंबिया विश्वविद्यालय ने इस मामले पर बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य शैक्षणिक परिसर में एक स्वस्थ और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना है। बयान में कहा गया, “हम सीखने के लिए सुरक्षित और अनुशासित वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विश्वविद्यालय की नीतियों का उल्लंघन करने वालों को परिणाम भुगतने होंगे।” इस निर्णय ने विश्वविद्यालय के रुख को साफ कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के राजनीतिक उग्रवाद या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं करेगा।
गाजा में इजरायल द्वारा किए जा रहे सैन्य हमलों के विरोध में अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों में फिलिस्तीन के समर्थन में छात्र आंदोलित हो उठे हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में भी यह आंदोलन तेजी से फैला। छात्रों ने परिसर में पोस्टर, नारेबाजी और सामूहिक धरनों के माध्यम से अपना विरोध जताया। प्रदर्शन में छात्रों ने इजरायली नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और फिलिस्तीनियों के मानवाधिकारों की रक्षा की मांग की।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जो इजरायल के कट्टर समर्थक माने जाते हैं, इन प्रदर्शनों से खासे नाराज़ दिखे। ट्रम्प प्रशासन की ओर से विश्वविद्यालयों को दस सूत्रीय निर्देश भेजे गए, जिनमें यह स्पष्ट किया गया था कि इजरायल विरोधी गतिविधियों को यहूदी-विरोधी भावना माना जाएगा। प्रशासन ने विश्वविद्यालयों से मांग की थी कि वे ऐसे आंदोलनों पर सख्ती से कार्रवाई करें। ट्रम्प के रुख के बाद कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने कड़ा कदम उठाते हुए छात्रों को निष्कासित कर दिया।
इस बीच, हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने ट्रम्प प्रशासन के निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि छात्रों को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस निर्णय के बाद हार्वर्ड और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। दूसरी ओर, कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रपति के निर्देशों का पालन करते हुए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया।
निष्कासित छात्रों और उनके समर्थन में खड़े छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कदम छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी थी और किसी तरह की हिंसा या संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया था। ऐसे में उन्हें निष्कासित करना अनुचित और अत्याचारी है।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी की इस कार्रवाई ने न केवल अमेरिकी शैक्षणिक जगत को झकझोर दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी इस पर बहस छिड़ गई है। कई मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों ने इस निर्णय पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि छात्रों की आवाज दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे अकादमिक स्वतंत्रता को खतरा हो सकता है।
कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा 80 छात्रों को निष्कासित करना और उनकी डिग्रियों को निरस्त करना अमेरिका में चल रहे इजरायल-विरोधी आंदोलनों पर सख्त प्रशासनिक प्रतिक्रिया का प्रतीक बन गया है। यह मामला न केवल अमेरिका, बल्कि दुनियाभर में छात्र राजनीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शैक्षणिक स्वतंत्रता को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर सरकार सुरक्षा और अनुशासन का हवाला दे रही है, तो दूसरी ओर छात्रों और मानवाधिकार समूह इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे अन्य विश्वविद्यालय इस दिशा में क्या रुख अपनाते हैं।
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