Congress Alliance Crisis
Congress Alliance Crisis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के करीब आते ही कांग्रेस के भीतर गठबंधन को लेकर खींचतान तेज हो गई है। इंडिया ब्लॉक (INDIA Alliance) के तहत राज्य में तीन प्रमुख ताकतें—तृणमूल कांग्रेस (TMC), कांग्रेस और वामदल (Left)—एक साथ नजर आती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तालमेल पूरी तरह उलझा हुआ है। पार्टी अब तक यह तय नहीं कर पाई है कि उसे ममता बनर्जी की टीएमसी के साथ हाथ मिलाना चाहिए, वामदलों के साथ गठबंधन जारी रखना चाहिए या फिर अकेले चुनाव लड़ना बेहतर होगा। इस दुविधा ने न केवल बंगाल बल्कि दिल्ली के गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है।
बंगाल की अंदरूनी राजनीति का मामला अब अंतरराज्यीय हो गया है। केरल कांग्रेस के हस्तक्षेप ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 23 जनवरी को दिल्ली में केरल कांग्रेस के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक का उद्देश्य बंगाल में होने वाले किसी भी संभावित गठबंधन का केरल के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव का आकलन करना है।
बंगाल कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने हाल ही में जमीनी हकीकत जानने के लिए सभी 33 जिलाध्यक्षों की राय ली। सूत्रों के मुताबिक, फीडबैक चौंकाने वाला रहा। कुल 33 में से 30 जिलाध्यक्षों ने अकेले चुनाव लड़ने की वकालत की है। केवल 2 नेताओं ने वामदलों के साथ गठबंधन का समर्थन किया, जबकि महज एक नेता ममता बनर्जी के साथ जाने के पक्ष में दिखा। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार जहां अकेले चुनाव लड़ने के पक्षधर हैं, वहीं पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी लगातार लेफ्ट के साथ तालमेल की पैरवी कर रहे हैं।
केरल कांग्रेस की चिंता का मुख्य कारण राज्य में उनकी चुनावी संभावनाएं हैं। केरल यूनिट का तर्क है कि वहां कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार बनने की पूरी उम्मीद है। केरल में कांग्रेस और लेफ्ट एक-दूसरे के मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं। अगर बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट एक साथ चुनाव लड़ते हैं, तो बीजेपी को यह प्रचार करने का हथियार मिल जाएगा कि कांग्रेस और लेफ्ट की लड़ाई महज एक ‘नूराकुश्ती’ है। इससे केरल के मतदाताओं में गलत संदेश जा सकता है और कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक छिटक सकता है।
कांग्रेस आलाकमान के लिए सबसे बड़ी चुनौती इंडिया ब्लॉक की एकजुटता को बनाए रखना है। अगर पार्टी दो प्रमुख राज्यों में अकेले चुनाव लड़ती है, तो विपक्षी गठबंधन के कमजोर होने का संदेश जाएगा। इसके अलावा, बंगाल में वामदलों का साथ छोड़ने पर राष्ट्रीय स्तर पर लेफ्ट की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। केंद्रीय नेतृत्व अब इस धर्मसंकट में है कि वह क्षेत्रीय आकांक्षाओं को महत्व दे या राष्ट्रीय गठबंधन के अनुशासन को।
केरल और बंगाल के नेताओं के साथ होने वाली आगामी बैठक से यह स्पष्ट है कि आलाकमान अब कोई भी फैसला जल्दबाजी में थोपना नहीं चाहता। पार्टी नेतृत्व को डर है कि अगर राज्यों की स्थानीय भावनाओं को नजरअंदाज किया गया, तो संगठन के भीतर बगावत हो सकती है। 23 जनवरी की बैठक के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कांग्रेस बंगाल में किसी दल के साथ समझौता करेगी या फिर अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरकर अपनी शक्ति का परीक्षण करेगी।
Puducherry Exit Poll 2026 : केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए…
Kerala Exit Poll 2026 : केरलम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण…
Tamil Nadu Exit Poll 2026 : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के संपन्न होने के बाद…
Assam Exit Poll 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के संपन्न होने के साथ ही कयासों…
West Bengal Exit Poll 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम चरण का…
Trump Iran Warning : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के…
This website uses cookies.