Delimitation Bill : आगामी सोमवार से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। इस सत्र में सरकार तीन महत्वपूर्ण संविधान संशोधन बिल पेश करने की योजना बना रही है। अपनी विधायी प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर रही है। इस संभावित विधायी हमले को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने भी अपनी जवाबी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में, दिल्ली में कांग्रेस संसदीय दल की एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई, जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया कि कांग्रेस पार्टी परिसीमन बिल का कड़ा विरोध करेगी। सोनिया गांधी के नेतृत्व में 10 जनपथ पर आयोजित इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से मंथन किया।

कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में मंथन और दिग्गजों की उपस्थिति
कांग्रेस की इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की पूरी सक्रियता दिखाई दी। सोनिया गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, शशि थरूर, पी. चिदंबरम, कुमारी शैलजा और मनीष तिवारी जैसे दिग्गज नेता मौजूद थे। मानसून सत्र के दौरान सरकार के संभावित कदमों को विफल करने और जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर इस बैठक में गहन चर्चा हुई। परिसीमन बिल को लेकर कांग्रेस की चिंताएं विशेष रूप से अधिक हैं, क्योंकि पिछली बार पार्टी इसे संसद में रोकने में सफल रही थी, लेकिन इस बार का राजनीतिक परिदृश्य और समीकरण काफी भिन्न हैं।

सत्ता पक्ष का गणित और बदलता राजनीतिक समीकरण
संसदीय गणित को देखें तो सरकार परिसीमन बिल को पारित कराने के लिए आवश्यक बहुमत के करीब पहुंचती दिख रही है। संविधान संशोधन के लिए सरकार को कुल 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है, जिसमें से वह अब तक 324 सांसदों का समर्थन जुटाने में सफल रही है। इसके अतिरिक्त, शरद पवार की एनसीपी (NCP) ने संकेत दिए हैं कि यदि परिसीमन बिल 50 प्रतिशत के फॉर्मूले पर आधारित होता है, तो उनका गुट सरकार का समर्थन कर सकता है। वहीं, द्रमुक (DMK) का समर्थन मिलने की स्थिति में यह आंकड़ा 354 तक पहुंच सकता है। यदि वाईएसआरसीपी (YSRCP) और उद्धव ठाकरे गुट के 3 सांसदों का समर्थन सरकार को मिल जाता है, तो परिसीमन बिल का पारित होना लगभग तय माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री की मैराथन बैठक और विपक्ष की चुनौती
सरकार की ओर से भी इस बिल को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विषय पर एक मैराथन बैठक की है, जो उनके आवास पर करीब ढाई घंटे तक चली। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नितिन नवीन जैसे वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री की यह सक्रियता दर्शाती है कि सरकार मानसून सत्र में किसी भी हाल में बिल पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने पिछली बार की सफलता को दोहराने का लक्ष्य रखा है, लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में विपक्ष के लिए यह राह आसान नहीं होगी। आगामी मानसून सत्र में सरकार का विधायी एजेंडा और विपक्ष का विरोध, देश की संसदीय राजनीति के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।
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