Modi Trump friendship: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत पर और अधिक टैरिफ लगाने की धमकी के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के खास रिश्ते की जमकर आलोचना की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने इस मामले पर तंज कसा और कहा, “दोस्त तो दोस्त होते हैं,” जिससे स्पष्ट तौर पर मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए गए हैं।

जयराम रमेश का तंज: ‘दोस्त दोस्त न रहा’
मंगलवार को एक बयान में जयराम रमेश ने कहा, “एक लोकप्रिय हिंदी गाना है—’दोस्त दोस्त न रहा’। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह बात अच्छी तरह पता होगी। आज यही स्थिति हमारे और अमेरिका के रिश्ते की हो गई है। ट्रंप, जो खुद को मोदी का खास दोस्त बताते हैं, अब भारत पर और ज्यादा टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं। इस दोस्ती का परिणाम बहुत महंगा साबित हुआ है। प्रधानमंत्री को इस पर जवाब देना चाहिए।”

ट्रंप की टैरिफ धमकी का विवरण
डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट किया कि भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है और उस तेल को खुले बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा है। उन्होंने कहा, “रूस के लगातार हमलों के कारण यूक्रेन एक मौत का जाल बन चुका है। यूक्रेन के इस संकट में रूस के ‘दोस्त’ भारत का कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए अमेरिका भारत पर और ज्यादा टैरिफ लगाएगा।”
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
ट्रंप के आरोपों के जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका भी अपने राष्ट्रीय हितों के लिए रूस के साथ व्यापार करता है। इसके साथ ही भारत ने यूरोपीय संघ की भी आलोचना की, जिन्होंने हाल ही में भारत की रूस से ऊर्जा खरीद पर सवाल उठाए हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता रहेगा और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहेगा।
दोस्ताना रिश्ते पर उठे सवाल
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को मोदी सरकार की विदेश नीति की विफलता के रूप में देखा है। जयराम रमेश ने कहा, “अगर यह दोस्ती सच में खास होती तो अमेरिका इस तरह की धमकी नहीं देता। मोदी सरकार को यह बताना होगा कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ उनका पुराना रिश्ता सिर्फ प्रचार का हिस्सा है या वास्तव में भारत के हितों का संरक्षण करता है।”
राजनीतिक महौल गरमाया
यह विवाद ऐसे समय पर उभरा है जब भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को लेकर कई अहम समझौते और बातचीत चल रही हैं। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के रिश्तों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। वहीं, भारत की कड़ी प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि नई दिल्ली किसी भी दबाव में नहीं आएगी।
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