Satyapal Malik : जानिए सत्यपाल मलिक का राजनीति में 57 साल का सफर, छात्रनेता से राज्यपाल तक का सफर

Satyapal Malik : जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार, 5 अगस्त को निधन हो गया। 79 वर्षीय मलिक ने दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और मई 2025 से अस्पताल में भर्ती थे। सत्यपाल मलिक की पहचान एक साफ़-सुथरे, बेबाक और किसान हितैषी नेता के रूप में थी। उनका निधन ऐसे दिन हुआ जब 5 साल पहले, 5 अगस्त 2019 को उनके ही कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था — इतिहास का एक निर्णायक क्षण। उत्तर प्रदेश से राज्य की राजनीति तक 24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावड़ा गांव में जन्मे सत्यपाल मलिक जाट समुदाय से थे। पिता का नाम बुध सिंह था, जिनका निधन सत्यपाल के डेढ़ साल की उम्र में हो गया था। उन्होंने मेरठ कॉलेज से B.Sc और फिर LLB की पढ़ाई की। उनकी पत्नी इक़बाल मलिक शिक्षिका और पर्यावरणविद थीं, जबकि बेटा देव कबीर मशहूर ग्राफिक डिजाइनर हैं, जिन्होंने बीयर ब्रांड Bira का लोगो डिजाइन किया है। छात्रसंघ से शुरू हुई राजनीति सत्यपाल मलिक की राजनीति में शुरुआत 1968 में मेरठ कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष बनने से हुई। 1974 में उन्होंने चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल से विधायक बनकर विधिवत राजनीतिक करियर की शुरुआत की। वो 1980 में राज्यसभा सदस्य बने और 1984 में कांग्रेस में शामिल हो गए। लेकिन 1987 में बोफोर्स कांड में कांग्रेस के फंसने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और 1988 में वीपी सिंह के जनता दल में शामिल हो गए। मंत्री बने, फिर कई दलों में सफर 1989 में अलीगढ़ से जनता दल के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता और वीपी सिंह सरकार में संसदीय कार्य और पर्यटन राज्य मंत्री बने। 1996 में सपा के टिकट पर अलीगढ़ से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 2004 में उन्होंने BJP जॉइन की और बागपत से चुनाव लड़ा, परंतु सफलता नहीं मिली। 2012 में बीजेपी ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया। इसके बाद उनका राजनीतिक कद गवर्नर पदों के रूप में और बढ़ा। राज्यपाल के तौर पर मजबूत छवि सत्यपाल मलिक ने बिहार (2017-2018), जम्मू-कश्मीर (2018-2019), गोवा (2019-2020) और मेघालय (2020-2022) के राज्यपाल पदों पर कार्य किया। 2018 में कुछ समय के लिए ओडिशा का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। उनके जम्मू-कश्मीर गवर्नर रहते ही 370 हटाया गया, जिसे भारत के संविधान और राजनीति का ऐतिहासिक क्षण माना जाता है। बेबाक वक्ता और किसान समर्थक मलिक हमेशा से किसानों और समाजवादी मूल्यों के पक्षधर रहे। उन्होंने कभी भी सरकार या पार्टी की आलोचना से परहेज़ नहीं किया। वे कहते थे, “मैं पांच कुर्ते-पायजामे लेकर राजनीति में आया था और उसी के साथ जाऊंगा।” उनका जीवन छात्रसंघ की राजनीति से लेकर संवैधानिक पदों तक एक प्रेरणादायक यात्रा रहा। Read More  : Modi Trump friendship : अमेरिकी टैरिफ धमकी के बाद कांग्रेस ने मोदी-ट्रंप की ‘दोस्ती’ पर उठाए सवाल: ‘दोस्त तो दोस्त होते हैं’

Satyapal Malik : जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार, 5 अगस्त को निधन हो गया। 79 वर्षीय मलिक ने दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और मई 2025 से अस्पताल में भर्ती थे। सत्यपाल मलिक की पहचान एक साफ़-सुथरे, बेबाक और किसान हितैषी नेता के रूप में थी। उनका निधन ऐसे दिन हुआ जब 5 साल पहले, 5 अगस्त 2019 को उनके ही कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था — इतिहास का एक निर्णायक क्षण।

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उत्तर प्रदेश से राज्य की राजनीति तक

24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावड़ा गांव में जन्मे सत्यपाल मलिक जाट समुदाय से थे। पिता का नाम बुध सिंह था, जिनका निधन सत्यपाल के डेढ़ साल की उम्र में हो गया था। उन्होंने मेरठ कॉलेज से B.Sc और फिर LLB की पढ़ाई की। उनकी पत्नी इक़बाल मलिक शिक्षिका और पर्यावरणविद थीं, जबकि बेटा देव कबीर मशहूर ग्राफिक डिजाइनर हैं, जिन्होंने बीयर ब्रांड Bira का लोगो डिजाइन किया है।

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छात्रसंघ से शुरू हुई राजनीति

सत्यपाल मलिक की राजनीति में शुरुआत 1968 में मेरठ कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष बनने से हुई। 1974 में उन्होंने चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल से विधायक बनकर विधिवत राजनीतिक करियर की शुरुआत की।

वो 1980 में राज्यसभा सदस्य बने और 1984 में कांग्रेस में शामिल हो गए। लेकिन 1987 में बोफोर्स कांड में कांग्रेस के फंसने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और 1988 में वीपी सिंह के जनता दल में शामिल हो गए।

मंत्री बने, फिर कई दलों में सफर

1989 में अलीगढ़ से जनता दल के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता और वीपी सिंह सरकार में संसदीय कार्य और पर्यटन राज्य मंत्री बने। 1996 में सपा के टिकट पर अलीगढ़ से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 2004 में उन्होंने BJP जॉइन की और बागपत से चुनाव लड़ा, परंतु सफलता नहीं मिली। 2012 में बीजेपी ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया। इसके बाद उनका राजनीतिक कद गवर्नर पदों के रूप में और बढ़ा।

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राज्यपाल के तौर पर मजबूत छवि

सत्यपाल मलिक ने बिहार (2017-2018), जम्मू-कश्मीर (2018-2019), गोवा (2019-2020) और मेघालय (2020-2022) के राज्यपाल पदों पर कार्य किया। 2018 में कुछ समय के लिए ओडिशा का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। उनके जम्मू-कश्मीर गवर्नर रहते ही 370 हटाया गया, जिसे भारत के संविधान और राजनीति का ऐतिहासिक क्षण माना जाता है।

बेबाक वक्ता और किसान समर्थक

मलिक हमेशा से किसानों और समाजवादी मूल्यों के पक्षधर रहे। उन्होंने कभी भी सरकार या पार्टी की आलोचना से परहेज़ नहीं किया। वे कहते थे, “मैं पांच कुर्ते-पायजामे लेकर राजनीति में आया था और उसी के साथ जाऊंगा।” उनका जीवन छात्रसंघ की राजनीति से लेकर संवैधानिक पदों तक एक प्रेरणादायक यात्रा रहा।

Read More  : Modi Trump friendship : अमेरिकी टैरिफ धमकी के बाद कांग्रेस ने मोदी-ट्रंप की ‘दोस्ती’ पर उठाए सवाल: ‘दोस्त तो दोस्त होते हैं’

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