India Politics : कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल पर तीखा प्रहार करते हुए उनके बहुचर्चित ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ के नारे को एक कोरा झूठ और छलावा करार दिया है। सोमवार को पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गवर्नेंस की जगह केवल घोटालों और मामलों को छिपाने का काम हुआ है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि असलियत में यह सरकार ‘खाऊंगा, खाने दूंगा और खिलाऊंगा’ की नीति पर चल रही है। कांग्रेस का मानना है कि मई 2014 में किए गए वादे पूरी तरह से खोखले साबित हुए हैं और जनता के साथ विश्वासघात किया गया है।

नोटबंदी से लेकर पीएम केयर्स फंड तक पर सवाल
जयराम रमेश ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इस वादे की पोल बहुत पहले ही खुल गई थी, जब डॉ. मनमोहन सिंह ने 2016 की नोटबंदी को ‘सुनियोजित लूट’ बताया था। कांग्रेस ने ‘पीएम केयर्स फंड’ की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसे पूरी तरह से अपारदर्शी बताया गया है। इसके साथ ही, सरकारी संस्थाओं जैसे CAG को कमजोर करने का आरोप भी लगाया गया है। पार्टी का कहना है कि सत्ता का दुरुपयोग करके संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लगातार खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि भ्रष्टाचार की परतें न खुल सकें।

अयोध्या राम मंदिर और चंदा चोरी का गंभीर आरोप
कांग्रेस ने हालिया विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के नाम पर ‘चंदा चोरी’ और आस्था के साथ खिलवाड़ ने देश को स्तब्ध कर दिया है। रमेश ने दावा किया कि यह आरएसएस-बीजेपी इकोसिस्टम के सदस्यों द्वारा किया गया एक बड़ा घोटाला है, जिसने देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। पार्टी के अनुसार, ये उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार के भीतर ही बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमतताएं और आस्था के नाम पर लोगों को गुमराह करने का सिलसिला चल रहा है।
अरुणाचल और मंत्रियों के फैसलों पर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के बावजूद वे पद पर बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खांडू के फैसलों से उनके परिवार को आर्थिक लाभ पहुंचा है। साथ ही, उन्होंने एक केंद्रीय राज्य मंत्री का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपनी ही सरकार की स्कीम से सब्सिडी ली है, लेकिन वे अभी भी कैबिनेट का हिस्सा हैं। कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष को तोड़ने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिए जा रहे हैं और भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार अपने लोगों को संरक्षण दे रही है।
भूपेंद्र यादव और धर्मेंद्र प्रधान पर भी तंज
लेख के अंत में रमेश ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के करीबी सहयोगियों को रातों-रात हटाए जाने पर सवाल उठाए और इसे भ्रष्टाचार की आग से उठता हुआ धुआं करार दिया। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी प्रधानमंत्री पर पक्षपात का आरोप लगाया। कांग्रेस का तर्क है कि सरकार के भीतर मची यह अफरा-तफरी और मंत्रियों पर उठ रहे सवाल मोदी सरकार की शुचिता के दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए पर्याप्त हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि सरकार अपने ही भ्रष्टाचार को छिपाने की जद्दोजहद में पूरी तरह उलझ चुकी है।
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