Alexander Duncan: अमेरिका के टेक्सास राज्य में स्थित शुगर लैंड शहर के श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर परिसर में स्थापित 90 फुट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा पर विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब रिपब्लिकन नेता और 2026 यूएस सीनेट चुनाव के उम्मीदवार अलेक्जेंडर डंकन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर एक विवादास्पद पोस्ट साझा की। डंकन ने प्रतिमा को ‘झूठे हिंदू देवता की मूर्ति’ बताते हुए लिखा कि, “हम एक ईसाई राष्ट्र हैं, फिर टेक्सास में इस मूर्ति को खड़ा करने की अनुमति क्यों दी गई?” इस बयान के बाद अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बहस छिड़ गई है।
डंकन की इस टिप्पणी के बाद हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) समेत कई हिंदू संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और स्थानीय प्रशासन से शिकायत दर्ज कराई है। संगठनों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां अमेरिकी संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हैं और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए खतरा पैदा करती हैं।
डंकन की पोस्ट ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया। जहां कुछ लोगों ने प्रतिमा हटाने की मांग की, वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स ने डंकन को संविधान की मूल भावना याद दिलाई। एक यूजर ने लिखा, “आप संविधान की रक्षा की बात करते हैं, लेकिन धार्मिक स्वतंत्रता की समझ तक नहीं रखते।” वहीं, एक अन्य ने कहा, “हिंदू धर्म झूठा नहीं, वेदों की रचना ईसा मसीह के जन्म से भी हजारों साल पहले हुई थी।”
यह हनुमान प्रतिमा अगस्त 2024 में प्रतिष्ठित की गई थी और इसे भारत के बाहर की सबसे ऊंची हनुमान मूर्तियों में गिना जा रहा है। यह अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी प्रतिमा मानी जाती है, जिसे प्रसिद्ध संत श्री चिन्नजीयर स्वामीजी के मार्गदर्शन में स्थापित किया गया। इसका उद्देश्य ना सिर्फ धार्मिक भावनाओं को सशक्त करना है, बल्कि सांस्कृतिक एकता का संदेश भी देना है।
अलेक्जेंडर डंकन एक पूर्व पुलिस अधिकारी और कट्टरपंथी रूढ़िवादी विचारधारा के समर्थक हैं। वे 2026 के टेक्सास यूएस सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी से उम्मीदवार हैं और खुद को ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का प्रवक्ता बताते हैं। डंकन पिछले 13 वर्षों से पुलिस सेवा में कार्यरत रहे हैं और सोशल मीडिया पर उनके 64,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं।
टेक्सास में हनुमान प्रतिमा को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि धार्मिक सहिष्णुता और संविधानिक मूल्यों की रक्षा आज भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अलेक्जेंडर डंकन की टिप्पणी ने न केवल हिंदू समुदाय को आहत किया है, बल्कि अमेरिका के विविधतापूर्ण समाज के मूल सिद्धांतों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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