Court Decision : लगभग पांच वर्ष पुराने बहुचर्चित हत्या मामले में सूरजपुर न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास तथा उसके सहयोगी को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सूरजपुर ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया। मामले में मृतक की हत्या कर शव को बांध के डुबान क्षेत्र में फेंककर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया था।

डुबान क्षेत्र में मिला था युवक का शव
प्रकरण के अनुसार 11 सितंबर 2021 को ग्राम बलदेवनगर निवासी मनोज उरांव ने थाना प्रेमनगर में सूचना दी थी कि बांगों बांध के डुबान क्षेत्र छोटे छुरी में पानी के ऊपर किसी व्यक्ति का पैर दिखाई दे रहा है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया। मृतक के गले में रस्सी बंधी हुई थी। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

जांच में हुई मृतक की पहचान
पुलिस जांच के दौरान मृतक की पहचान सुरेन्द्र यादव (22 वर्ष), निवासी हनुमानगढ़, थाना रामानुजनगर के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु को हत्यात्मक पाए जाने पर थाना प्रेमनगर में अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध हत्या एवं साक्ष्य छिपाने का मामला दर्ज किया गया।
जीजा ने की थी हत्या, पिता ने दिया साथ
विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि सुरेन्द्र 5 सितंबर 2021 को अपनी बहन और जीजा के घर अंबिकापुर गया था। जांच में सामने आया कि उसी दौरान किसी बात को लेकर सुरेन्द्र और उसके जीजा सुखसाय उर्फ गंवटिया बरगाह के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी ने लकड़ी की पराठी से सुरेन्द्र के सिर पर वार कर दिया और बाद में रस्सी से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद आरोपी ने अपने पिता महावीर बरगाह की मदद से शव को बोरे में भरकर साइकिल के साथ छोटे छुरी बांध के डुबान क्षेत्र में ले जाकर पत्थर बांधकर पानी में फेंक दिया, ताकि घटना के साक्ष्य नष्ट किए जा सकें।
पुलिस ने जुटाए मजबूत साक्ष्य
मामले की जांच तत्कालीन विवेचक उप निरीक्षक निर्मल राजवाड़े ने की। पुलिस ने वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक रमेश सिंह कुशवाहा ने प्रभावी पैरवी की।
न्यायालय ने सुनाई सजा
इस मामले की सुनवाई विद्धान न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सूरजपुर के यहां हुई। माननीय न्यायालय ने मामले की सुनवाई 05 जून 2026 को पूरी कर समग्र तथ्यों के आधार पर दोषसिद्ध सुखसाय उर्फ गंवटिया को धारा 302 भारतीय दण्ड संहिता के आरोप में आजीवन कारावास, धारा 201, 34 भादसं. के आरोप में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 200 रूपये का अर्थदण्ड और दोषसिद्ध महावीर को धारा 201, 34 भारतीय दण्ड संहिता के आरोप में 3 वर्ष का सश्रम कारावास व 100 रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया है।











