Crypto Regulations
Crypto Regulations 2026: भारत में क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते चलन के साथ ही डिजिटल धोखाधड़ी और अवैध वित्तीय गतिविधियों के खतरों में भी वृद्धि हुई है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की वित्तीय खुफिया इकाई यानी फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) ने एक बड़ा कदम उठाया है। 8 जनवरी को जारी की गई नई गाइडलाइंस के माध्यम से सरकार ने क्रिप्टो एक्सचेंजों और यूजर्स के लिए नियमों को पहले से कहीं अधिक सख्त कर दिया है। इन नए ‘एंटी मनी लॉन्ड्रिंग’ (AML) और ‘नो योर कस्टमर’ (KYC) नियमों का प्राथमिक उद्देश्य डीपफेक तकनीक के जरिए होने वाले फ्रॉड को रोकना और क्रिप्टो मार्केट की पारदर्शिता को बढ़ाना है।
ताजा दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब सभी क्रिप्टो एक्सचेंजों को ‘वर्चुअल डिजिटल ऐसेट सर्विस प्रोवाइडर’ (VDA-SP) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अब तक केवाईसी की प्रक्रिया केवल दस्तावेजों को अपलोड करने तक सीमित थी, लेकिन अब एक्सचेंजों को ‘गहरी जांच’ (Enhanced Due Diligence) का सामना करना पड़ेगा। मार्च 2023 के नियमों में लगभग तीन साल बाद किए गए इस बदलाव के तहत अब एक्सचेंजों के लिए जियो-टैगिंग और फिजिकल प्रेजेंस की जांच अनिवार्य कर दी गई है। इसका अर्थ है कि अब केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा, बल्कि सिस्टम को यह सुनिश्चित करना होगा कि सेवा प्रदाता और ग्राहक दोनों की लोकेशन वास्तविक है।
डिजिटल पहचान की चोरी और डीपफेक वीडियो के बढ़ते मामलों को देखते हुए एफआईयू ने ‘लाइव सेल्फी’ का नियम लागू किया है। अब नए अकाउंट खोलते समय यूजर्स को एक खास सॉफ्टवेयर के जरिए सेल्फी लेनी होगी। यह सॉफ्टवेयर ‘लाईवनेस डिटेक्शन’ तकनीक पर काम करेगा, जिसमें यूजर को कैमरा के सामने पलक झपकाने या सिर हिलाने जैसे निर्देश दिए जाएंगे। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि स्क्रीन के पीछे कोई असली इंसान है, न कि कोई पहले से रिकॉर्ड की गई फोटो या एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो। यह कदम सुरक्षा की दृष्टि से एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।
नए नियमों के तहत अब यूजर्स की प्राइवेसी के साथ-साथ सुरक्षा ट्रैकिंग को भी मजबूत किया गया है। अकाउंट बनाते समय एक्सचेंज को यूजर के आईपी एड्रेस (IP Address) के साथ-साथ उसकी सटीक भौगोलिक स्थिति यानी अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) का रिकॉर्ड रखना होगा। इसके अलावा ट्रांजैक्शन की तारीख और समय का सटीक डेटा भी स्टोर किया जाएगा। यह डेटा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में जांच एजेंसियों को अपराधी तक पहुंचने में मदद करेगा।
ग्राहकों के बैंक खातों की प्रामाणिकता जांचने के लिए अब ‘एक रुपये का ट्रांजैक्शन’ (Penny Drop Test) अनिवार्य कर दिया गया है। इससे यह साबित होगा कि बैंक खाते का स्वामित्व वास्तव में उसी यूजर के पास है जो अकाउंट खोल रहा है। पहचान के लिए अब केवल पैन कार्ड पर्याप्त नहीं होगा; यूजर्स को पैन के साथ आधार, पासपोर्ट या वोटर आईडी जैसे दूसरे पहचान पत्र भी देने होंगे। इसके अलावा, ईमेल और मोबाइल नंबर का ओटीपी (OTP) वेरिफिकेशन भी अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा होगा।
इन गाइडलाइंस में क्रिप्टो एक्सचेंजों को इनिशियल कॉइन ऑफरिंग (ICO) और इनिशियल टोकन ऑफरिंग (ITO) जैसे निवेशों को बढ़ावा न देने की सलाह दी गई है, क्योंकि इनमें जोखिम अधिक होता है। साथ ही, क्रिप्टो मिक्सर, टंबलर और ऐसे टोकन जो यूजर की पहचान छिपाने (Anonymity) में मदद करते हैं, उनसे जुड़े लेन-देन की सुविधा न देने का निर्देश दिया गया है। सरकार चाहती है कि हर एक ट्रांजैक्शन की ट्रेल (पदचिह्न) स्पष्ट हो ताकि टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।
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