Gold Silver Crash
Gold Silver Crash: भारतीय सर्राफा बाजार और वायदा कारोबार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में नरमी का रुख बना रहा। वैश्विक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों के सतर्क रुख ने कीमती धातुओं की चमक को थोड़ा फीका कर दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक, कीमतों पर दबाव साफ तौर पर देखा जा रहा है। घरेलू बाजार में महानगरों के भीतर भाव में मामूली अंतर है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार गिरावट के साथ स्थिर बना हुआ है।
मंगलवार सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में लाल निशान के साथ कारोबार शुरू हुआ। सुबह 09:43 बजे तक 5 जून की डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 1,53,900 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं, चांदी की कीमतों में अधिक गिरावट देखी गई। 5 मई की डिलीवरी वाले चांदी के अनुबंध में बीते सत्र के मुकाबले 0.62 प्रतिशत की कमी आई और यह 2,50,971 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मांग में कमी और डॉलर की मजबूती ने इन कीमतों को प्रभावित किया है।
प्रमुख महानगरों में सोने की हाजिर कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव देखा गया। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट (99.9% शुद्धता) सोना ₹15,544 प्रति ग्राम के स्तर पर रहा, जबकि 22 कैरेट की कीमत ₹14,250 प्रति ग्राम रही। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों में कीमतें लगभग एक समान रहीं, जहां 24 कैरेट सोना ₹15,529 प्रति ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। दक्षिण भारत के चेन्नई में कीमतें अन्य शहरों के मुकाबले थोड़ी अधिक दर्ज की गईं, जहां 24 कैरेट सोने का भाव ₹15,600 प्रति ग्राम तक पहुँच गया।
वैश्विक मंच पर सोने की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोना 4,800 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बना हुआ है। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच होने वाली दूसरे दौर की वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश से दूर रखा है। 22 अप्रैल को सीजफायर की अवधि खत्म होने वाली है, और बाजार में इस बात को लेकर डर है कि यदि वार्ता विफल रही, तो मध्य पूर्व में संघर्ष और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा।
मध्य पूर्व में जारी तनाव ने न केवल सोने बल्कि ऊर्जा आपूर्ति पर भी गहरा असर डाला है। कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने वैश्विक महंगाई (Inflation) को बढ़ाने का काम किया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकते हैं। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि यह बिना ब्याज वाली संपत्ति है। गौरतलब है कि ईरान संघर्ष की शुरुआत के बाद से अब तक सोने की कीमतों में 8% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।
वर्तमान बाजार की स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं। 22 अप्रैल के बाद आने वाले भू-राजनीतिक अपडेट सोने की अगली दिशा तय करेंगे। फिलहाल, घरेलू स्तर पर कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय अस्थिरता को देखते हुए किसी भी बड़े निवेश से पहले बाजार के रुख को समझना अनिवार्य है। आने वाले दिनों में यदि डॉलर और मजबूत होता है या ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं, तो सोने की कीमतों में और अधिक करेक्शन देखने को मिल सकता है।
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