Cyber Fraud Network : देशभर में साइबर ठगी से हासिल रकम को ठिकाने लगाने वाले कथित नेटवर्क के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने मुंबई के वकील रशेश भरतकुमार उपाध्याय उर्फ रशेश शाह को 24 अक्टूबर को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। आरोप है कि वह दिल्ली जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट से निकलने की कोशिश कर रहा था। यह इस मामले में सातवीं गिरफ्तारी है। गोवा की विशेष PMLA अदालत ने आरोपी को 29 अक्टूबर तक ED की हिरासत में भेज दिया है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.6 करोड़ की ठगी
ED की जांच गोवा में दर्ज डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी के मामले से शुरू हुई। आरोप है कि ठगों ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर एक महिला और उसके पति को डराया। महिला को लगातार वीडियो निगरानी में रखा गया और सुप्रीम कोर्ट का कथित फर्जी आदेश दिखाया गया। इसके बाद दंपती से करीब 2.6 करोड़ रुपये कथित तौर पर अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।

400 से ज्यादा म्यूल खातों से रकम का लेन-देन
जांच एजेंसी के मुताबिक, ठगी की रकम 400 से अधिक म्यूल बैंक खातों के जरिए कमोडिटी, ट्रैवल और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़ी कंपनियों तक पहुंचाई गई। आरोप है कि फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद इन कंपनियों को डमी निदेशकों के माध्यम से नियंत्रित कर रहे थे। ED इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
28 हजार करोड़ के बैंक लेन-देन का दावा
ED के अनुसार, नेटवर्क के जरिए करीब 28,000 करोड़ रुपये के बैंक लेन-देन और लगभग 2,900 करोड़ रुपये नकद जमा किए जाने के संकेत मिले हैं। इससे जुड़े खाते 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 300 से अधिक शिकायतों और 160 से ज्यादा FIR में सामने आए हैं। इन मामलों में 400 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की शिकायतें दर्ज होने की बात कही गई है।
फ्रीज खाते खुलवाने के बदले रिश्वत का आरोप
ED का आरोप है कि रशेश शाह साइबर ठगी से जुड़े बैंक खातों को दोबारा चालू करवाने में अहम भूमिका निभाता था। जांच एजेंसियों द्वारा खाते फ्रीज किए जाने के बाद कथित तौर पर कुछ अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी। इसके लिए नकदी या हवाला पहुंचाने वाले अंगड़िया बिचौलियों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। एजेंसी के मुताबिक, आरोपी रिश्वत तय करने और भुगतान की व्यवस्था संभालता था।

100 बैंक खाते खुलवाने का दावा
जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने करीब 100 बैंक खाते दोबारा चालू करवाने की बात स्वीकार की है। इनमें एक मामले में 60 लाख रुपये से अधिक के भुगतान का उल्लेख है। ED के मुताबिक, खातों को दोबारा सक्रिय करने से कथित नेटवर्क को ठगी की रकम आगे भेजने में मदद मिलती रही।
छापेमारी के बाद चैट डिलीट करने का आरोप
ED के अनुसार, छापेमारी के बाद भी आरोपी कथित गतिविधियों में शामिल रहा। जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने सह-आरोपियों के साथ बातचीत के चैट डिलीट किए और अपने ज्ञात मोबाइल नंबर बंद कर दिए। मुंबई एयरपोर्ट पर उसे पकड़ने में कस्टम्स और CISF ने सहायता की।
वकील की पहचान के इस्तेमाल की जांच
ED का आरोप है कि आरोपी ने वकील होने की पहचान का इस्तेमाल खातों को खुलवाने और कथित रिश्वत के लेन-देन में किया। एजेंसी के मुताबिक, उसने संबंधित कंपनियों की ओर से अदालत में पेशी या वकालतनामा दाखिल नहीं किया था। मामले में पहले छह गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि कथित रिश्वत किन अधिकारियों तक पहुंची और नेटवर्क से अर्जित अपराध की कुल रकम कितनी है।
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