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Dalit PM chance: मोहन भागवत के रिटायरमेंट वाले बयान के बाद सिद्धारमैया का भाजपा पर तंज, कहा- यह दलित को पीएम बनाने का सुनहरा मौका

Dalit PM chance : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणी ने देश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। भागवत ने संकेत दिया था कि 75 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद किसी भी व्यक्ति को कार्यस्थल छोड़ देना चाहिए। इस टिप्पणी को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए संकेत माना गया।

कांग्रेस ने उठाया मुद्दा, भाजपा पर किया वार

कांग्रेस ने मोहन भागवत के बयान को हथियार बनाते हुए भाजपा पर सीधा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने इसे मोदी सरकार के लिए विदाई का संकेत बताया। अब कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक कदम आगे बढ़कर भाजपा से दलित प्रधानमंत्री बनाने की मांग की है।

सिद्धारमैया ने भाजपा को दिया ‘दलित पीएम’ का सुझाव

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि 75 वर्षीय प्रधानमंत्री को राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। ऐसे में भाजपा के पास अब एक दलित को प्रधानमंत्री बनाने का सुनहरा अवसर है।” उन्होंने भाजपा को सलाह दी कि दूसरों को उपदेश देने से पहले खुद एक दलित नेता को पीएम पद के लिए आगे करे।

मोदी के भविष्य को लेकर संघ और भाजपा में मतभेद के संकेत?

मोहन भागवत के इस बयान से यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या संघ और भाजपा के बीच मोदी के भविष्य को लेकर मतभेद हैं। जबकि पिछले वर्ष अमित शाह ने साफ कर दिया था कि भाजपा के संविधान में 75 वर्ष की उम्र सीमा अनिवार्य नहीं है और नरेंद्र मोदी 2029 तक सक्रिय रहेंगे। भागवत की टिप्पणी ने इस बात को चुनौती देने वाले सुरों को हवा दी है।

विजयेंद्र ने दिया पलटवार, सिद्धारमैया ने फिर किया कटाक्ष

भाजपा के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने सिद्धारमैया के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस दलित प्रधानमंत्री चाहती है, तो उन्हें मल्लिकार्जुन खड़गे को पीएम उम्मीदवार घोषित करना चाहिए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धारमैया ने भाजपा पर कटाक्ष किया और कहा, “भाजपा केवल प्रतीकात्मक राजनीति करती है। वे द्रौपदी मुर्मू के नाम का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री बनने लायक नहीं मानते।”

2029 से पहले नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट?

मोहन भागवत के बयान और कांग्रेस की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि अगले आम चुनाव से पहले राजनीतिक नेतृत्व और जातीय समीकरणों को लेकर गहमागहमी तेज हो चुकी है। कांग्रेस जहां इसे अवसर के रूप में भुना रही है, वहीं भाजपा को अब संघ के आंतरिक संकेतों और विपक्ष के आरोपों दोनों का सामना करना पड़ सकता है। यह बयानबाज़ी आगामी लोकसभा चुनावों से पहले देश में नेतृत्व और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर बड़े विमर्श की भूमिका बना सकती है।

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