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Indian soldier spy : पाकिस्तान को खुफिया जानकारी देने का मामला, जम्मू-कश्मीर से भारतीय सेना का जवान गिरफ्तार

Indian soldier spy : पंजाब पुलिस के राज्य विशेष अभियान प्रकोष्ठ (SSOC) को एक और बड़ी सफलता मिली है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर से भारतीय सेना के एक जवान को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए जवान की पहचान देविंदर सिंह के रूप में हुई है, जो पंजाब के संगरूर जिले के निहालगढ़ गांव का निवासी है।

पहले से गिरफ्तार गुरप्रीत सिंह से मिली थी जानकारी

देविंदर की गिरफ्तारी जून महीने में पकड़े गए एक अन्य आरोपी गुरप्रीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद सामने आई। गुरप्रीत, सेना से सेवानिवृत्त हो चुका है और पंजाब की फिरोजपुर जेल में बंद है। उस पर आईएसआई को पेन ड्राइव के माध्यम से संवेदनशील सैन्य दस्तावेज सौंपने का आरोप है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुरप्रीत की पूछताछ के दौरान देविंदर का नाम सामने आया, जिसके बाद उसकी गतिविधियों पर निगरानी शुरू की गई और अंततः उसे उरी से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुणे में हुई थी मुलाकात, संपर्क में बने रहे

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि देविंदर और गुरप्रीत की पहली मुलाकात साल 2017 में पुणे के एक सैन्य शिविर में हुई थी। उस समय दोनों सेना में कार्यरत थे। पोस्टिंग अलग-अलग होने के बावजूद दोनों ने संपर्क बनाए रखा। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इसी दौरान देविंदर भी आईएसआई के संपर्क में आया और उसने भी गोपनीय सैन्य दस्तावेज पाकिस्तान पहुंचाए।

देविंदर से जारी है पूछताछ

देविंदर सिंह को उरी से गिरफ्तार कर पंजाब लाया गया है, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि उसने किन-किन जानकारियों को लीक किया और उसके संपर्क में और कौन-कौन लोग हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में काम कर रही हैं।

पश्चिम बंगाल से भी दो गिरफ्तारियां

इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी दो युवकों को इसी तरह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन पर आरोप था कि ये NGO की आड़ में काम कर रहे थे और VPN के जरिए आईएसआई को देश की गुप्त सूचनाएं भेजते थे। दोनों ने अलग-अलग स्थानों से काम करते हुए कई संवेदनशील जानकारियां साझा की थीं।

लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह स्पष्ट हो गया है कि देश की सुरक्षा के लिए आंतरिक खतरों से निपटना बेहद आवश्यक हो गया है। सेना में कार्यरत या पूर्व सैनिकों द्वारा संवेदनशील जानकारी का दुरुपयोग बेहद गंभीर चिंता का विषय है। पंजाब पुलिस और अन्य एजेंसियां अब इस नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में जुट गई हैं।

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