Naxal Surrender
Naxal Surrender : छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में शांति और विकास की दिशा में सुरक्षा बलों को एक ऐतिहासिक सफलता प्राप्त हुई है। राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ योजना से प्रभावित होकर मंगलवार को पांच सक्रिय माओवादियों ने हिंसा का रास्ता पूरी तरह छोड़ने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में चार महिला कैडर का शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि अब नक्सली विचारधारा के भीतर भी विद्रोह और शांति की चाहत बढ़ रही है। इन सभी ने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपने हथियार डाले और समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर नया जीवन शुरू करने का संकल्प लिया।
आत्मसमर्पण करने वाले ये नक्सली दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) जैसे खतरनाक नेटवर्क का हिस्सा थे। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में पश्चिम बस्तर डिवीजन का एसीएम सोमे कड़ती प्रमुख है, जिस पर शासन द्वारा पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अतिरिक्त, तीन अन्य पार्टी सदस्य और एक महिला कैडर भी शामिल हैं, जिन पर सामूहिक रूप से नौ लाख रुपये का इनाम था। इन नक्सलियों के हटने से संगठन की क्षेत्रीय पकड़ कमजोर हुई है। पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने स्पष्ट किया कि सरकार की पुनर्वास नीति का मुख्य उद्देश्य गुमराह युवाओं को सुरक्षा, सम्मान और रोजगार प्रदान करना है।
इन नक्सलियों के आत्मसमर्पण के तुरंत बाद सुरक्षा बलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली। सरेंडर करने वाले नक्सलियों द्वारा दी गई सटीक जानकारी (निशानदेही) के आधार पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान नक्सलियों द्वारा छिपाए गए 40 घातक हथियारों का जखीरा बरामद किया गया। यह बरामदगी भैरमगढ़ और गंगालूर एरिया कमेटी के डंपों से हुई है। इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों का मिलना नक्सली संगठन के सैन्य ढांचे के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे उनकी हमला करने की क्षमता काफी हद तक कम हो गई है।
जंगलों से बरामद किए गए हथियारों में कई आधुनिक और प्रतिबंधित हथियार शामिल हैं। पुलिस द्वारा साझा की गई सूची के अनुसार, सुरक्षा बलों ने 8 SLR (सेल्फ लोडिंग राइफल), 3 इंसास राइफल, एक घातक कारबाइन, एक .303 राइफल और 5 BGL (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) सहित कुल 40 हथियार जब्त किए हैं। ये वे हथियार हैं जो अक्सर सुरक्षा बलों पर घात लगाकर किए जाने वाले हमलों में उपयोग किए जाते थे। इन हथियारों की बरामदगी न केवल क्षेत्र में संभावित हिंसा को टालने में सहायक होगी, बल्कि नक्सलियों के मनोवैज्ञानिक मनोबल को भी पूरी तरह तोड़ देगी।
दंतेवाड़ा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने स्थानीय जनता में विश्वास का संचार किया है। अधिकारियों का मानना है कि ‘पूना मारगेम’ योजना केवल एक पुनर्वास कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में विश्वास और विकास की नई नींव है। सरकार की स्पष्ट नीति है कि जो भी व्यक्ति हिंसा का त्याग करेगा, उसे शासन की योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। अधिकारियों ने अपील की है कि अन्य नक्सली भी हिंसा छोड़कर अपने परिवारों के पास वापस लौटें। इस घटनाक्रम से यह साफ संदेश गया है कि बस्तर के जंगलों में अब गोलियों की गूंज के बजाय विकास और शांति की आवाज प्रमुख होगी।
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