Donald Trump vs NATO
Donald Trump vs NATO: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद आक्रामक बयान सामने आया है। ईरान के खिलाफ जारी युद्ध में अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय सहयोग न मिलने से तिलमिलाए ट्रंप ने उन देशों को दोटूक सुना दिया है जिन्होंने इस सैन्य अभियान में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो देश इस मुश्किल घड़ी में अमेरिका के साथ खड़े नहीं हुए, उन्हें अब अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा स्वयं करनी होगी। अमेरिका अब उनके लिए ‘ढाल’ बनकर खड़ा नहीं रहेगा। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रणनीतिक मार्ग को लेकर ट्रंप ने सहयोगियों को अपनी राह खुद चुनने की चेतावनी दी है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘सोशल ट्रुथ’ (Social Truth) पर पोस्ट साझा करते हुए विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम (UK) को अपने निशाने पर लिया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि कई बार औपचारिक अनुरोध और मदद की अपील के बावजूद ब्रिटेन ने इस युद्ध में शामिल होने से हाथ पीछे खींच लिए। इतना ही नहीं, ट्रंप ने नाटो (NATO) देशों से भी खुलकर सैन्य सहायता मांगी थी, लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। ईरान युद्ध के चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप ने इसे विश्वासघात की तरह देखते हुए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जो वैश्विक कूटनीति में एक बड़ी दरार का संकेत दे रहा है।
अपने पोस्ट में ट्रंप ने उन देशों के लिए, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण जेट फ्यूल और तेल की किल्लत झेल रहे हैं, दो विकल्प रखे हैं। उन्होंने लिखा:”पहला सुझाव—अमेरिका से तेल खरीदें, क्योंकि हमारे पास ऊर्जा संसाधनों का विशाल भंडार है। दूसरा—थोड़ी हिम्मत जुटाएं, होर्मुज जलडमरूमध्य तक जाएं और उसे बलपूर्वक हासिल करें। अब आपको अपने अस्तित्व के लिए खुद लड़ना सीखना होगा। अमेरिका आपकी मदद के लिए वहां मौजूद नहीं रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे आप हमारे लिए उपलब्ध नहीं थे।”ट्रंप ने आगे दावा किया कि ईरान अब पूरी तरह से तबाह हो चुका है और कठिन सैन्य कार्य संपन्न हो चुका है, इसलिए अब देशों को अपना तेल खुद सुरक्षित करना चाहिए।
इससे पूर्व, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि वह जल्द से जल्द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खोल दे और समझौते की मेज पर आए, अन्यथा उसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया जाएगा। हालांकि, तेहरान पर इन धमकियों का कोई विशेष असर नहीं देखा गया। इसके विपरीत, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़राइल पर अपने हमलों की तीव्रता को और बढ़ा दिया है। इसी हताशा में अब ट्रंप का गुस्सा ब्रिटेन जैसे पारंपरिक सहयोगियों पर निकल रहा है, जो क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक नया संकट पैदा कर सकता है।
31 मार्च 2026 की यह स्थिति दर्शाती है कि अमेरिका अब अपनी “अमेरिका फर्स्ट” नीति को और भी आक्रामक तरीके से लागू कर रहा है। ट्रंप का यह बयान न केवल ब्रिटेन बल्कि संपूर्ण यूरोपीय संघ और नाटो सहयोगियों के साथ अमेरिका के संबंधों को पुनर्परिभाषित कर सकता है। ईरान युद्ध ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य में सैन्य और ऊर्जा सुरक्षा के समीकरण बदलने वाले हैं। यदि सहयोगी देश इस युद्ध से दूरी बनाए रखते हैं, तो आने वाले समय में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर एक नया और अधिक व्यापक वैश्विक संघर्ष छिड़ सकता है।
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