Dattatreya Hosabale
Dattatreya Hosabale: हरियाणा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का भव्य समापन हुआ। बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने भविष्य की योजनाओं और वर्तमान वैश्विक घटनाक्रमों पर संघ का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ अब अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव करने जा रहा है ताकि कार्य का विकेंद्रीकरण कर उसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। साथ ही, उन्होंने भारतीय परंपराओं और मूल्यों के आधार पर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु और उसके बाद पैदा हुए वैश्विक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने भारतीय संस्कृति की विशालता का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि भारत की यह महान परंपरा रही है कि किसी भी व्यक्ति के जीवित रहते हुए वैचारिक विरोध हो सकता है, लेकिन मृत्यु के पश्चात उस विरोध का अंत हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में विरोध का स्थान है, परंतु यह पूर्णतः शांतिपूर्ण और मर्यादित होना चाहिए। यह बयान अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच मानवीय मूल्यों की प्रधानता को रेखांकित करता है।
संगठनात्मक विस्तार की जानकारी देते हुए सरकार्यवाह ने बताया कि संघ अब देश के सबसे दुर्गम और सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बना चुका है। अंडमान के द्वीपों, अरुणाचल की पहाड़ियों और लेह की वादियों में अब संघ की शाखाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि अंडमान के 9 टापूओं पर संघ का कार्य मजबूती से फैला है, जहां सरसंघचालक के कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। दुर्गम क्षेत्रों के हर गांव तक पहुंचना और वहां सेवा कार्य शुरू करना संघ का प्रमुख आगामी लक्ष्य है।
होसबोले ने कहा कि संघ की शाखाओं में आने वाले स्वयंसेवक प्रांतीयता, जाति और भाषाई संकीर्णता से ऊपर उठकर केवल ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव से सोचते हैं। उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ (सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य) को देश भर में सुचारू रूप से लागू करने पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शाखा की गुणवत्ता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है, ताकि समाज में एक सकारात्मक और सही नैरेटिव (विमर्श) स्थापित किया जा सके और औपनिवेशिक मानसिकता को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
पिछले वर्ष के कार्यों का ब्यौरा देते हुए उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी के शताब्दी वर्ष और वंदे मातरम की 150वीं जयंती पर देश भर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। गुरु तेग बहादुर जी को समस्त भारत का गुरु बताते हुए उन्होंने कहा कि उनसे जुड़े 2134 कार्यक्रमों में लगभग 7 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त, युवाओं को जोड़ने के लिए विशेष प्रशिक्षण वर्गों की योजना बनाई गई है, जो अप्रैल से जून के बीच आयोजित होंगे। संघ ने ‘हरित घर’ के कॉन्सेप्ट के तहत छतों पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की भी बात कही।
संघ के विस्तार को देखते हुए प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए विकेंद्रीकरण का एक बड़ा निर्णय लिया गया है। दत्तात्रेय होसबोले ने बताया कि वर्तमान में संघ के 45 प्रांत हैं, जिन्हें शताब्दी वर्ष के बाद पुनर्गठित कर 80 से अधिक संभागों में बदला जाएगा। हालांकि, यह नई व्यवस्था अगली प्रतिनिधि सभा के बाद पूर्ण रूप से प्रभावी होगी। इस बदलाव का उद्देश्य कार्य की निगरानी को सरल बनाना और मैदानी स्तर पर स्वयंसेवकों की सक्रियता को बढ़ाना है। शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ ‘गृह संपर्क’ अभियान के जरिए समाज की ‘सज्जन शक्ति’ को एकजुट करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
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