North Korea: उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन एक बार फिर मानवाधिकार हनन को लेकर वैश्विक मंच पर चर्चा में हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (UNHRC) की ताज़ा रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है कि उत्तर कोरिया में विदेशी फिल्में या टीवी कार्यक्रम देखने पर नागरिकों को मौत की सजा दी जा रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में मृत्युदंड की संख्या में खतरनाक इजाफा हुआ है, और जिन लोगों को सजा दी जा रही है, उनमें बड़ी संख्या उन युवाओं की है जो दक्षिण कोरियाई ड्रामा, पॉप म्यूज़िक या हॉलीवुड फिल्मों से प्रभावित हैं। उत्तर कोरिया के कानूनों के मुताबिक, देशविरोधी कंटेंट देखना “गंभीर अपराध” है।

क्या कहती है रिपोर्ट?
कई नागरिकों को विदेशी कंटेंट देखने के लिए मौत की सजा दी गई।दक्षिण कोरियाई फिल्में, म्यूज़िक वीडियो और नाटक देखने पर कड़ी निगरानी और दंड।निजता का अधिकार पूरी तरह समाप्त, किम शासन हर नागरिक के जीवन को पूरी तरह नियंत्रित करता है।सफेद शादी की ड्रेस पर भी प्रतिबंध, क्योंकि यह “पश्चिमी संस्कृति” का प्रतीक माना जाता है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं क्रूर घटनाएं
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से पहले भी कई दक्षिण कोरियाई और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने दावा किया था कि: पिछले वर्ष 30 किशोरों को केवल विदेशी सीरीज देखने के जुर्म में सार्वजनिक रूप से गोली मार दी गई।एक बाढ़ प्रबंधन में विफल रहने के कारण 30 सरकारी कर्मचारियों को भी मौत की सजा दी गई थी।इन घटनाओं ने उत्तर कोरिया के भीतर तानाशाही की पराकाष्ठा को दुनिया के सामने उजागर किया है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और चिंता
संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट एक बार फिर वैश्विक समुदाय को मानवाधिकार उल्लंघन पर चिंतन करने के लिए मजबूर कर रही है। किम जोंग उन का शासन ना केवल सूचना और विचारों की स्वतंत्रता को कुचल रहा है, बल्कि किसी भी तरह की सांस्कृतिक खिड़की को भी बंद करने पर तुला है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तकनीक और इंटरनेट पर नियंत्रण के जरिए सरकार नागरिकों की सोच, जीवनशैली और पसंद-नापसंद को पूरी तरह नियंत्रित करती है।उत्तर कोरिया में जारी इस तरह के दमनकारी कानून और सजाएं इस बात की पुष्टि करते हैं कि देश एक पूर्ण तानाशाही शासन के अधीन है, जहां नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, संस्कृति और मनोरंजन की पसंद को भी मौत की सजा मिल सकती है। संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट दुनिया को चेतावनी देती है कि उत्तर कोरिया में मानवाधिकारों की स्थिति बेहद चिंताजनक और भयावह है।
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