D.Ed candidates protest
D.Ed candidates protest: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन गई है। शनिवार को डीएड (D.Ed) प्रशिक्षित सहायक शिक्षक अभ्यर्थियों ने अपनी लंबित नियुक्तियों की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री के निवास का घेराव करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने पहुंचे थे, लेकिन माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग का सहारा लिया। अभ्यर्थियों और पुलिस बल के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई ने प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है और इसे सत्ता की “संवेदनहीनता” करार दिया जा रहा है।
प्रदर्शन कर रहे डीएड अभ्यर्थियों का मुख्य आरोप है कि वे चयन प्रक्रिया के सभी मापदंडों को पूरा कर चुके हैं, इसके बावजूद विभाग उन्हें नियुक्ति पत्र देने में आनाकानी कर रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों के बाद भी उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है। लंबे समय से बेरोजगारी की मार झेल रहे इन युवाओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें ठोस आश्वासन और ज्वाइनिंग की तारीख नहीं मिल जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पदों पर भर्ती नहीं करनी थी, तो विज्ञापन और परीक्षा का ढोंग क्यों रचा गया?
शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर जिस तरह से शिक्षित बेरोजगारों पर बल प्रयोग किया गया, उसकी चौतरफा निंदा हो रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पुलिस अभ्यर्थियों को घसीटकर बसों में भरते हुए दिखाई दे रही है। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने इस घटना को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं के साथ संवाद करने के बजाय उन पर लाठियां भांजना या उन्हें हिरासत में लेना सत्ता की बढ़ती संवेदनहीनता को दर्शाता है। यह घटना दर्शाती है कि शासन प्रशासन के पास इन युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल दमनकारी नीतियां बची हैं।
इस पूरी घटना के बाद विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका मिल गया है। कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों ने बयान जारी कर कहा है कि भाजपा सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले मंत्री अब अपने ही घर के बाहर खड़े बेरोजगारों से मिलने को तैयार नहीं हैं। यह विरोध प्रदर्शन केवल कुछ अभ्यर्थियों का नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के हजारों युवाओं की हताशा का प्रतीक है, जो अपनी योग्यता के बावजूद सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर हैं।
रायपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद अभ्यर्थियों का मनोबल गिरा नहीं है, बल्कि उनमें आक्रोश और बढ़ गया है। आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि अब यह लड़ाई केवल रायपुर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदेश के हर जिले में मशाल जुलूस और प्रदर्शन किए जाएंगे। उधर, शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि मामला कानूनी दांव-पेंचों में फंसा हुआ है, जिसकी वजह से प्रक्रिया में देरी हो रही है। हालांकि, अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार को बीच का रास्ता निकालकर जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए। रायपुर की यह “ब्रेकिंग” खबर आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति का मुख्य मुद्दा बनी रह सकती है।
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