Parliament Row : ग्लास्गो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का भव्य समापन हो गया। समापन समारोह के दौरान एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब मेजबान शहर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी के लिए भारत को आधिकारिक तौर पर खेलों का ध्वज और बैटन सौंप दिया। यह शताब्दी संस्करण भारत के अहमदाबाद में आयोजित किया जाएगा। समारोह में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पी.टी. उषा और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भारत की ओर से ध्वज और बैटन ग्रहण किया। इसके साथ ही भारत दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला देश बन गया। इससे पहले वर्ष 2010 में नई दिल्ली ने इन खेलों का सफल आयोजन किया था, जबकि ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत ऐसा करने वाला दूसरा देश होगा।

अहमदाबाद को मेजबान बनाए जाने पर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद
2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी अहमदाबाद को मिलने के बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। हरियाणा से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि हरियाणा देश के लिए सबसे अधिक पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का राज्य है, तो खेलों की मेजबानी गुजरात को क्यों दी गई। उन्होंने संसद परिसर में अन्य सांसदों के साथ प्रदर्शन करते हुए हरियाणा को मेजबान या सह-मेजबान राज्य बनाने की मांग उठाई। सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने लिखा कि “जब पदक हरियाणा के खिलाड़ी जीतते हैं, तो खेलों की मेजबानी गुजरात को क्यों मिलती है?” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

हरियाणा के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन बना बहस का आधार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक अपने नाम किए, जिनमें 13 स्वर्ण पदक शामिल रहे। इनमें हरियाणा के खिलाड़ियों का योगदान सबसे अधिक रहा। राज्य के खिलाड़ियों ने 7 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य पदक जीतकर भारत की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दीपेंद्र हुड्डा ने राज्यवार पदक तालिका साझा करते हुए दावा किया कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने 11 पदक जीते, जबकि गुजरात के खाते में कोई पदक नहीं आया। उन्होंने इसे आधार बनाते हुए कहा कि खेलों की मेजबानी तय करते समय खिलाड़ियों के योगदान को भी महत्व मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खिलाड़ियों की उपलब्धि पर जताया गर्व
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि हरियाणा को देश के सबसे मजबूत खेल केंद्रों में शामिल करती है। उन्होंने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को बेहतर सुविधाएं और प्रोत्साहन देने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया है और उनकी उपलब्धियां पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं।
बबीता फोगाट ने दीपेंद्र हुड्डा पर किया पलटवार
कांग्रेस सांसद के बयान पर ओलंपियन और कॉमनवेल्थ गेम्स पदक विजेता पहलवान बबीता फोगाट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि जब वर्ष 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स दिल्ली में आयोजित हुए थे, तब इस तरह की मांग क्यों नहीं उठाई गई। उन्होंने कहा कि दीपेंद्र हुड्डा लंबे समय तक हरियाणा कुश्ती संघ से जुड़े रहे, लेकिन उस दौरान राज्य में किसी बड़े राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की पहल नहीं की गई। बबीता ने आरोप लगाया कि अब इस मुद्दे को केवल राजनीतिक लाभ के लिए उठाया जा रहा है।

मेडल हरियाणा देता है, खेल गुजरात मे क्यों?
आज संसद परिसर में कॉमनवेल्थ खेल 2030 के लिए हरियाणा को मेजबान या सह-मेजबान राज्य बनाने की मांग को लेकर हरियाणा के साथी सांसदों – सांसद जयप्रकाश जेपी जी, सांसद @VarunMullana जी, सांसद सतपाल ब्रह्मचारी जी और सांसद कर्मबीर बौद्ध जी के साथ… pic.twitter.com/E83Ugt9Yo1
— Deepender Singh Hooda (@DeependerSHooda) August 3, 2026
राष्ट्रीय आयोजन को राजनीति से दूर रखने की अपील
बबीता फोगाट ने अपने बयान में कहा कि जब किसी भारतीय राज्य में अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता आयोजित होती है, तो उसकी मेजबानी पूरे देश की मानी जाती है, न कि केवल उस राज्य की। उन्होंने कहा कि भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व स्तर पर चौथा स्थान हासिल किया, लेकिन विपक्ष ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करने के बजाय आयोजन स्थल को लेकर राजनीति शुरू कर दी। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत और देश की उपलब्धियों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
2030 कॉमनवेल्थ गेम्स पर अब तैयारियों के साथ राजनीतिक नजरें भी
अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 भारत के लिए खेल, बुनियादी ढांचे और वैश्विक प्रतिष्ठा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हालांकि आयोजन स्थल को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद भी चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर केंद्र और गुजरात सरकार इस आयोजन की तैयारियों को लेकर उत्साहित हैं, वहीं विपक्ष मेजबानी के चयन को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बहस केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहती है या खेलों के आयोजन से जुड़े किसी बड़े निर्णय को भी प्रभावित करती है।
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