Tariq Anwar on Yogi: उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो चुका है। विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन भी अयोध्या राम मंदिर में कथित दान चोरी का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा। इस दौरान समाजवादी पार्टी ने इस मामले पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के रवैये को अनुचित बताते हुए पलटवार किया। इसी राजनीतिक बहस के बीच बिहार के कटिहार से कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर चुनावी राजनीति करने का आरोप लगाया।

तारिक अनवर ने संविधान का दिया हवाला
मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद तारिक अनवर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर सवाल पूछा गया, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर भगवान राम तथा सनातन परंपरा का सम्मान न करने का आरोप लगाया था। इस पर तारिक अनवर ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री संविधान की भावना को प्राथमिकता देते, तो किसी एक धर्म का उल्लेख करने के बजाय सभी धर्मों के सम्मान की बात करते। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की जिम्मेदारी सभी समुदायों के प्रति समान व्यवहार करने की होती है और किसी विशेष धर्म को राजनीतिक बहस का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए।

‘चोरी के आरोप उठेंगे तो सवाल भी पूछे जाएंगे’
तारिक अनवर ने आगे कहा कि यदि किसी धार्मिक स्थल या सार्वजनिक संस्था से जुड़े मामले में चोरी अथवा अनियमितता के आरोप सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से जनता और विपक्ष सवाल उठाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री का बयान पूरी तरह राजनीतिक है और चुनावी माहौल बनते ही भाजपा के नेता धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाने लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया जाता है, जबकि अन्य जनहित के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
विधानसभा में दूसरे दिन भी जारी रहा हंगामा
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी भारी हंगामे के बीच गुजरा। सरकार ने सदन में वर्ष 2026-27 के लिए 59,019.54 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। हालांकि बजट पेश होने के दौरान भी विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार का विरोध जारी रखा। समाजवादी पार्टी के विधायकों ने राम मंदिर दान मामले को लेकर नारेबाजी की और सरकार से जवाब मांगा। विपक्षी सदस्य सदन के भीतर लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई। इसके जवाब में भाजपा के विधायकों ने भी नारे लगाते हुए विपक्ष के आरोपों का विरोध किया।
योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के रवैये को बताया अनुचित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में विपक्ष के व्यवहार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक परंपराओं और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है, इसलिए किसी भी सदस्य को मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या राम मंदिर से जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन है और ऐसे विषय पर सदन में जिस प्रकार का प्रदर्शन किया गया, वह न केवल सदन की गरिमा के विपरीत है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का भी सम्मान नहीं करता। उन्होंने विपक्ष के आचरण को अलोकतांत्रिक और शर्मनाक बताया।

राम मंदिर विवाद बना चुनावी बहस का केंद्र
अयोध्या राम मंदिर से जुड़ा कथित दान विवाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। एक ओर विपक्ष इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा इसे आस्था से जुड़े विषय पर राजनीति करने का प्रयास बता रही है। विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ऐसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने रह सकते हैं।
चुनावी माहौल में बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। ऐसे में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। राम मंदिर दान विवाद भी अब चुनावी चर्चा का अहम विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है, जबकि जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच वास्तविक तथ्यों और जांच प्रक्रिया में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।
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