Delhi AQI: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा ग्रैप-3 (Graded Response Action Plan – Stage 3) लागू करने के बावजूद हालात में सुधार नहीं दिख रहा है। बुधवार सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 413 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। वायु में बढ़ते प्रदूषण कणों के चलते सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। लोगों को आंखों में जलन, खांसी और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
Delhi AQI: प्रदूषण के आंकड़ों में लगातार वृद्धि
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली का प्रदूषण स्तर तेजी से बढ़ा है। 9 नवंबर को जहां औसत AQI 370 दर्ज किया गया था, वहीं 10 नवंबर को यह घटकर 362 हुआ। लेकिन इसके बाद हालात फिर खराब होने लगे। 11 नवंबर को AQI 428 तक पहुंच गया और 12 नवंबर को भी मामूली सुधार के बावजूद यह 413 के खतरनाक स्तर पर बना रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति ठंडी हवाओं और धीमी वायु गति के कारण और भी बिगड़ सकती है, जिससे प्रदूषणकण वातावरण में जमे रहते हैं।
Delhi AQI: दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण की स्थिति
दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद गंभीर है। आरके पुरम में AQI 441, पंजाबी बाग में 443 और सीरीफोर्ट में 437 दर्ज किया गया। आईटीओ जैसे व्यस्त इलाकों में AQI 434 तक पहुंच गया है। वहीं, अलीपुर में 430 और मंदिर मार्ग पर 417 दर्ज किया गया। इन इलाकों में धुंध और धुएं की मोटी परत नजर आ रही है। हालांकि द्वारका क्षेत्र में AQI 210 रहा, जो तुलनात्मक रूप से थोड़ा बेहतर है, लेकिन यह भी ‘खराब’ श्रेणी में आता है।
एनसीआर में भी स्थिति चिंताजनक
दिल्ली से सटे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा पार कर चुका है। नोएडा में औसत AQI 414 और ग्रेटर नोएडा में 398 दर्ज किया गया, जबकि गुरुग्राम का AQI स्तर 365 रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते निर्माण कार्य, डीजल वाहनों का धुआं, पराली जलाना और औद्योगिक गतिविधियां प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।
ग्रैप-3 के तहत लागू किए गए सख्त कदम
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने ग्रैप-3 के तहत कई सख्त पाबंदियां लागू की हैं।निर्माण कार्यों पर रोक: गैर-जरूरी निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।डीजल वाहनों पर बैन: पुराने डीजल वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई है और अंतरराज्यीय डीजल बसों को भी सीमित किया गया है।सामग्री की आवाजाही पर नियंत्रण: सीमेंट, रेत और बालू जैसी धूल फैलाने वाली सामग्रियों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।शैक्षणिक संस्थान: कक्षा 5 तक के स्कूलों को बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई का निर्देश दिया गया है।
खनन और स्टोन क्रशर गतिविधियां बंद: सभी खनन और स्टोन क्रशिंग कार्यों पर रोक लगा दी गई है।डीजल जेनरेटरों पर रोक: आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी निजी और व्यावसायिक संस्थानों में डीजल जेनरेटर के उपयोग पर पाबंदी लगाई गई है।वर्क फ्रॉम होम की सलाह: कंपनियों को कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मोड में काम करने की सलाह दी गई है।
जनता से सरकार की अपील
दिल्ली सरकार और प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ने जनता से अपील की है कि वे निजी वाहनों का उपयोग कम करें, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें और किसी भी प्रकार के खुले में कचरा या पत्तियां न जलाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्रदूषण के स्रोतों पर स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाना मुश्किल होगा।दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति इस समय अत्यंत गंभीर है।
प्रशासनिक कदमों के बावजूद हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा। ऐसे में जरूरी है कि सरकार, उद्योग और नागरिक सभी मिलकर इस संकट से निपटने के लिए ठोस कदम उठाएं। केवल अस्थायी प्रतिबंधों से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक नीतियों और जनजागरूकता से ही दिल्ली की सांसें फिर से साफ हो सकती हैं।