Delhi Blast:
Delhi Blast: दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार को हुए ब्लास्ट में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है और 20 से अधिक लोग घायल हैं। धमाके में आसपास खड़ी कई गाड़ियों और संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।इस मामले में फरीदाबाद पुलिस ने संदिग्ध लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट कार (DL 10 CK 0458) बरामद की है। यह कार खंदावली गांव के पास खड़ी मिली। पुलिस ने अभी तक कार की तलाशी नहीं ली है और इसके लिए FSL और अन्य जांच एजेंसियों को बुलाया जा रहा है। पुलिस को शक है कि कार में विस्फोटक सामग्री हो सकती है।
एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस न्यू सीलमपुर, उत्तर-पूर्वी दिल्ली स्थित पते पर पहुंची, जहां यह कार पंजीकृत थी। रिकॉर्ड से पता चला कि कार डॉ. उमर उन नबी के नाम पर पंजीकृत है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि कार खरीदने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने स्थानीय निवासियों से पूछताछ की और दस्तावेजों की पुष्टि की।पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसी पते पर मदरसा चलाने वाले इमाम मोहम्मद तसव्वुर ने कहा कि उन्होंने इलाके में कभी कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं देखी। इसके बावजूद जांच एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और सभी संभावनाओं का विश्लेषण कर रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, उमर नबी ब्लास्ट करने से पहले कमला मार्किट की एक मस्जिद में लगभग 10 मिनट रुका। इसके बाद वह लाल किला की ओर चला गया। सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों का ट्रैक कर रही हैं।इस मामले में आज Al Falah यूनिवर्सिटी से लगभग 50 लोगों को डिटेन किया गया है, जिनमें से लगभग 95% कश्मीरी छात्र हैं। यह कार्रवाई जांच को आगे बढ़ाने के लिए की गई है।फैज़ ए इलाही मस्जिद, जो रामलीला मैदान के कोने में तुर्कमान गेट के सामने स्थित है, तब्लीगी जमात की गतिविधियों के लिए जानी जाती है। यह मस्जिद निजामुद्दीन मरकज़ से अलग होकर काम करती है। जांच एजेंसियां इस मस्जिद और आसपास की गतिविधियों को भी गहनता से देख रही हैं।
शाहीन, जो सहारनपुर और हापुड़ में मिनी कमांड सेंटर बनाने की योजना बना रही थी, शहर से बाहर ऐसी जगह तलाश रही थी जहां कम लोग हों और गतिविधियां कम दिखें। यहां महिलाओं को आतंकी ट्रेनिंग दी जाती और बाहर एनजीओ के नाम से फंडिंग का काम दिखाया जाता। यह फाउंडेशन गरीब मुस्लिम लड़कियों की पढ़ाई और इलाज के नाम पर बनाया जा रहा था ताकि टेरर फंडिंग जांच एजेंसियों की नजर में न आए।पिछले छह महीने से शाहीन सेंटर बनाने की तैयारी कर रही थी। सेंटर में कुल 10 बड़े कमरे और एक तहखाना बनाया गया था। यहां इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं होता, ताकि प्रशिक्षण लेने वाली लड़कियां सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखें। बाहरी हिस्से में अस्थायी दवाखाना और स्कूल है, जबकि बाकी हिस्सों में होस्टल और ट्रेनिंग हॉल तैयार किया गया।
इस सेंटर में प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को मुंतजिमा कहा जाता था। सेंटर में उन्हें जिहाद के लिए तैयार किया जाता और समय-समय पर जैश के आतंकियों के लेक्चर कराए जाते। सुरक्षा एजेंसियां इन गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रही हैं।दिल्ली लाल किला ब्लास्ट और संदिग्ध गतिविधियों के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। संदिग्ध कार और प्रशिक्षित समूहों की जांच अभी जारी है। यात्रियों और नागरिकों से अपील की गई है कि वे सुरक्षा अधिकारियों के साथ सहयोग करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
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