Delhi Pollution GRAP 4
Delhi Pollution GRAP 4: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली धुंध की चादर में लिपटी नजर आ रही है। शनिवार, 17 जनवरी 2026 को प्रदूषण का स्तर अचानक खतरनाक सीमा को पार कर गया, जिससे समूचे एनसीआर (NCR) में स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 428 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर+’ (Severe+) श्रेणी में आता है। प्रदूषण के इस जानलेवा स्तर को देखते हुए प्रशासन ने बिना किसी देरी के ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चौथे चरण को तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दे दिया है।
शनिवार का दिन दिल्लीवासियों के लिए काफी भारी रहा। दोपहर के समय हवा की गुणवत्ता पहले से ही खराब थी, लेकिन शाम होते-होते स्थिति और भी भयावह हो गई। शाम 4 बजे जहां एक्यूआई 400 के स्तर पर था, वहीं रात 8 बजे तक यह बढ़कर 428 तक पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि हवा की गति कम होने और तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण की निचली सतह पर जम गए हैं। बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र सरकार के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की सब-कमेटी ने आपात बैठक बुलाई और ग्रैप-4 के सख्त नियमों को लागू करने की मंजूरी दे दी।
ग्रैप-4 लागू होने का मतलब है कि अब दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में पाबंदियां अपने उच्चतम स्तर पर होंगी। पहले से लागू ग्रैप स्टेज-1, 2 और 3 के प्रतिबंधों के साथ अब स्टेज-4 के अतिरिक्त नियम भी जुड़ गए हैं। इसके तहत दिल्ली में बाहरी राज्यों से आने वाले आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर अन्य सभी भारी ट्रकों और व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 मानक वाले वाहनों को ही प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे अवैध रूप से चल रहे वाहनों पर भारी जुर्माना लगाएं और निगरानी बढ़ाएं।
ग्रैप-4 के तहत निर्माण कार्यों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसमें फ्लाईओवर, सड़कें, पाइपलाइन और बिजली की लाइनों जैसे सार्वजनिक और निजी सभी प्रकार के निर्माण कार्य शामिल हैं। दिल्ली के भीतर चलने वाले प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों को भी बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ (Work From Home) पर भेजने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य मानवीय गतिविधियों से होने वाले उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर पर लाना है ताकि वातावरण में कुछ सुधार हो सके।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्कूलों के संचालन को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। ग्रैप-4 लागू होने के बाद प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के निर्देश दिए जा सकते हैं, ताकि बच्चों को जहरीली हवा के संपर्क में आने से बचाया जा सके। सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए मैकेनाइज्ड स्वीपिंग और पानी के छिड़काव को दोगुना कर दिया गया है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें और सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो और बसों का सहारा लें।
राजधानी में प्रदूषण का यह स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रैप-4 लागू होने से निश्चित तौर पर प्रदूषण के स्रोतों पर लगाम लगेगी, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने और मौसम की स्थिति में बदलाव नहीं होता, तब तक स्थायी राहत मिलना मुश्किल है। फिलहाल, दिल्ली और एनसीआर के निवासियों को सलाह दी गई है कि वे मास्क का उपयोग करें और बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।
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