Delhi Riots Case: गुरुवार को दिल्ली दंगों से जुड़े जमानत मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में गर्म मिजाज रही। दिल्ली पुलिस ने कई बार अदालत में कहा कि कुछ लोग ‘बुद्धिजीवी’ का मुखौटा पहनकर देश के खिलाफ गलत नैरेटिव बना रहे हैं और उनकी गतिविधियां सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं हैं। पुलिस ने तंज कसते हुए कहा, “न्यूयॉर्क टाइम्स और सोशल मीडिया हर बार जमानत के मामलों में सक्रिय हो जाते हैं, बिना यह समझे कि ये लोग बुद्धिजीवी का चोला ओढ़े हुए देश-विरोधी हैं।”
Delhi Riots Case: देशविरोधी गतिविधियों पर पुलिस का आरोप
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस ने यह तर्क दिया कि कुछ लोग देश की डिग्रियों और सुविधाओं का फायदा उठाकर उन्हें बाद में हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। पुलिस का कहना था कि कुछ उच्च शिक्षित युवा जैसे डॉक्टर, इंजीनियर और शोधकर्ता, जो अपनी पेशेवर जिंदगी से हटकर हिंसा में शामिल हो रहे हैं, यह एक नया ट्रेंड है।
Delhi Riots Case: शरजील इमाम के वीडियो की चर्चा
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम के कई वीडियो क्लिप्स अदालत में चलाए, जो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में उनके द्वारा किए गए भाषणों के थे। इन वीडियो में इमाम को जामिया, चांदखेडा, अलीगढ़ और आसनसोल में ‘सड़क बंद करने’ और ‘सरकार की मनमानी न मानने’ जैसी बातें करते हुए दिखाया गया। पुलिस ने इन वीडियो को दंगों के साथ सीधे जुड़ा हुआ बताया और दावा किया कि यह कोई “सरल प्रदर्शन” नहीं था, बल्कि हिंसा के साथ उनका सीधा लिंक था।
पुलिस की दलीलें और आरोप
पुलिस ने अदालत में कहा कि इन आरोपियों की जमानत में देरी उनकी खुद की रणनीति का परिणाम है, और अब उन्हें इसका फायदा नहीं उठाने दिया जा सकता। पुलिस ने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया और विदेशी मीडिया का दखल जमानत मामलों में कृत्रिम नैरेटिव बना रहा है। पुलिस के अनुसार, यह हिंसक प्रदर्शन था और आरोपपत्र में सभी गतिविधियों को शामिल किया गया है।
UAPA के तहत जमानत की कठिनाई
पुलिस ने यह भी बताया कि मामले में UAPA (Unlawful Activities (Prevention) Act) के तहत मामला चल रहा है, और इस कारण जमानत का मानक और कठोर होगा। दिल्ली पुलिस ने अदालत को याद दिलाया कि दंगों के दौरान 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे, इसलिए यह मामला साधारण जमानत का नहीं हो सकता।
मुख्य आरोपी और उनके खिलाफ आरोप
साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों के बाद पुलिस ने कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपियों में प्रमुख नाम हैं:
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उमर खालिद
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शरजील इमाम
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गुलफिशा फ़ातिमा
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मीरान हैदर
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शिफा-उर-रहमान
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का मौजूदा स्थिति
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायधीशों ने पुलिस से यह पूछा कि क्या वीडियो आरोपपत्र का हिस्सा हैं, जिस पर पुलिस ने सकारात्मक उत्तर दिया। इसके बाद कोर्ट ने यह जानना चाहा कि क्या अभियोजन पक्ष के पास दंगों से जुड़े आरोपियों का प्रत्यक्ष लिंक दिखाने वाले सबूत हैं। पुलिस ने अदालत को यह बताया कि मामले में कुल 53 लोगों की मौत हो चुकी थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे, इसलिए यह जमानत का सामान्य मामला नहीं हो सकता।
अगला कदम: क्या होगा जमानत का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से विस्तृत जवाब मांगे हैं। अदालत ने अगले चरण की सुनवाई के लिए दोनों पक्षों से और अधिक जानकारी मांगी है। अब अगले कुछ दिनों में यह तय होगा कि इन आरोपियों की जमानत पर क्या फैसला आता है और यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
दिल्ली दंगे के आरोपी नेताओं की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई ने एक नया मोड़ लिया है। पुलिस की ओर से पेश किए गए वीडियो क्लिप्स और आरोपियों की गतिविधियों के आधार पर यह मामला अब और भी संवेदनशील हो गया है। अदालत अब दोनों पक्षों के जवाब के बाद इस पर अंतिम फैसला सुनाएगी, जो राजनीति और समाज के विभिन्न वर्गों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
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