Delhi to Siliguri Bullet Train : भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में मोदी सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली से पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी तक एक नई बुलेट ट्रेन चलाने का बड़ा ऐलान किया है। मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड कॉरिडोर के बाद यह देश की दूसरी सबसे बड़ी बुलेट ट्रेन परियोजना होगी। अपने कोलकाता दौरे के दौरान रेल मंत्री ने ‘दिल्ली-सिलिगुड़ी हाईस्पीड कॉरिडोर’ की आधिकारिक घोषणा की। यह बुलेट ट्रेन दिल्ली से शुरू होकर उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से गुजरते हुए सीधे पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी तक पहुंचेगी, जिससे देश के चार बड़े राज्य आपस में कनेक्ट हो जाएंगे।

दो कॉरिडोर को मिलाकर बनेगा महा-रूट
यह विशाल बुलेट ट्रेन कॉरिडोर वास्तव में दो अलग-अलग हाईस्पीड रूटों को जोड़कर तैयार किया जाएगा। इसके पहले हिस्से में ‘दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड कॉरिडोर’ शामिल है, जबकि दूसरे हिस्से में ‘वाराणसी-पटना-सिलिगुड़ी हाईस्पीड कॉरिडोर’ को समाहित किया गया है। केंद्र सरकार ने आगामी बजट में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अपनी शीर्ष प्राथमिकता वाले प्लान में रखा है। भविष्य में इस रूट का विस्तार असम के गुवाहाटी तक किए जाने की भी प्रबल संभावना है, जिससे पूर्वोत्तर भारत के राज्यों की कनेक्टिविटी देश की राजधानी से बेहद मजबूत हो जाएगी।

यूपी, बिहार और बंगाल के इन प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी रफ्तार की यह जादुई ट्रेन
दिल्ली-वाराणसी-सिलिगुड़ी बुलेट ट्रेन नई दिल्ली स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू करेगी। इसके बाद यह उत्तर प्रदेश के नोएडा (जेवर एयरपोर्ट), मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और गाजीपुर जैसे प्रमुख शहरों में स्टॉपेज लेगी। बिहार में प्रवेश करते ही यह राजधानी पटना से गुजरेगी और फिर वहां से पश्चिम बंगाल के उत्तरी पर्यटन स्थल सिलिगुड़ी (न्यू जलपाईगुड़ी के नजदीक) पर जाकर समाप्त होगी। इस रूट के बनने से उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार तक का सफर बेहद सुगम और तेज हो जाएगा।
300 किमी की स्पीड से दौड़ेगी ट्रेन
वर्तमान समय में दिल्ली से सिलिगुड़ी की लगभग 1500 किलोमीटर की दूरी तय करने में राजधानी एक्सप्रेस या दुरंतो एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों को भी 18 से 20 घंटे का समय लगता है। हालांकि, बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनने के बाद यह सफर महज 6 घंटे में सिमट जाएगा। यह ट्रेन 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से पटरियों पर दौड़ेगी। समय सारिणी के अनुसार, दिल्ली से वाराणसी की दूरी करीब 3 घंटे 50 मिनट, दिल्ली से पटना 4 घंटे 20 मिनट और वाराणसी से सिलिगुड़ी का सफर मात्र 2 घंटे 55 मिनट में पूरा होगा।
सेना को भी मिलेगी बड़ी मदद
सिलिगुड़ी को भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर कहा जाता है, जो पूरे पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इस हाईस्पीड कॉरिडोर के निर्माण से न केवल पर्यटन उद्योग को पंख लगेंगे, बल्कि भारतीय सेना और रसद की आवाजाही भी बेहद आसान और त्वरित हो जाएगी। उत्तर भारत की घनी आबादी वाले राज्यों यूपी और बिहार को भी इस रूट से बड़ी राहत मिलेगी और दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़-भाड़ से निजात मिल सकेगी।
बंगाल में रेलवे पर 1 लाख करोड़ का निवेश
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पश्चिम बंगाल में बुलेट ट्रेन सहित विभिन्न रेल परियोजनाओं को रफ्तार देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण और अलायनमेंट के काम में तेजी लाई जा रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए पिछली सरकारों पर निशाना साधा और कहा कि ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते बंगाल को सिर्फ 4 हजार करोड़ मिलते थे, जबकि वर्तमान एनडीए सरकार ने साल 2026-27 के लिए बंगाल को रिकॉर्ड 14,205 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अलावा कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नेक्स्ट जेनरेशन ट्रेनें शुरू की जाएंगी और राज्य में सालों से अटकी 100 से अधिक रेलवे परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा।











