Delimitation 2026: दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में अंतरराज्यीय जल विवाद, लोकसभा सीटों के परिसीमन, बुनियादी ढांचे और राज्यों के बीच सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठे। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। उन्होंने राज्यों से आपसी बातचीत और सहयोग के जरिए लंबे समय से लंबित जल विवादों को जल्द सुलझाने की अपील की। दक्षिण भारतीय राज्यों ने भी इस सुझाव का समर्थन करते हुए विवादों के व्यावहारिक समाधान पर जोर दिया।
अमित शाह ने जल विवाद खत्म करने की अपील की
अमित शाह ने कहा कि राज्य अपने हितों की रक्षा जरूर करें, लेकिन किसी विवाद के कारण अगर वर्षों तक पानी का उपयोग न हो सके और नदी का पानी समुद्र में बहता रहे, तो इसका फायदा किसी को नहीं मिलता। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे बातचीत और आपसी सहमति के जरिए जल विवादों का समाधान निकालें, ताकि पानी का बेहतर इस्तेमाल हो सके और क्षेत्रीय विकास को गति मिले।
नदियों को जोड़ने से जल संकट का समाधान संभव
गृह मंत्री ने ब्रह्मपुत्र से लेकर कावेरी और गोदावरी तक प्रमुख नदियों को जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उनका कहना था कि अगर इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए तो भारत को आने वाले लंबे समय तक जल संकट से राहत मिल सकती है। नदी जोड़ने की योजनाओं से सिंचाई के साथ-साथ जलमार्गों के विकास को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता
बैठक में लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। दक्षिणी राज्यों ने चिंता जताई कि यदि सीटों का पुनर्वितरण मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।
543 लोकसभा सीटें बरकरार रखने की मांग
कर्नाटक और तमिलनाडु ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग रखी। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने और महिलाओं के लिए आरक्षण को मौजूदा सीटों के भीतर लागू करने का सुझाव दिया। उनका तर्क था कि इससे दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से बचाया जा सकेगा।
मेकेदातु परियोजना पर कर्नाटक का भरोसा
बैठक के दौरान मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर भी चर्चा हुई। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु और पुडुचेरी के हितों की रक्षा का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े विषयों पर राज्यों के बीच संवाद बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी पक्ष की चिंताओं का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जा सके।
कावेरी विवाद बैठक से रहा बाहर
तमिलनाडु की ओर से स्पष्ट किया गया कि दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में कर्नाटक के साथ चल रहे कावेरी जल बंटवारे के विवाद पर चर्चा नहीं हुई। कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण से संबंधित मामलों को भी बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं किया गया था।
चंद्रबाबू नायडू ने रखा बुलेट ट्रेन का प्रस्ताव
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कुप्पम के रास्ते संभावित कॉरिडोर विकसित करने के साथ अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले ट्रांजिट नेटवर्क का सुझाव भी दिया।
केरल ने मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा उठाया
केरल की ओर से मुल्लापेरियार बांध से जुड़े मुद्दे को बैठक में उठाया गया। राज्य ने स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई। सहकारी संघवाद को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
तेलंगाना ने कृष्णा नदी के पानी पर मांगा अधिकार
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमरका ने कृष्णा नदी के पानी में राज्य के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की। उन्होंने प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग मांगा। वहीं पुडुचेरी ने सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तमिलनाडु सहित पड़ोसी राज्यों के सहयोग की आवश्यकता बताई। बैठक में राज्यों ने स्पष्ट किया कि जल, परिवहन और विकास से जुड़े मुद्दों का समाधान आपसी समन्वय और बातचीत से ही संभव है।
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