Delimitation 2026: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रस्तावित परिसीमन को लेकर अपनी पुरानी मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय पर सरकार को आगे बढ़ने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। खरगे के मुताबिक, परिसीमन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को संसद में रखने से पहले सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को उसका विस्तृत अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
विशेष सत्र की संभावना के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
खरगे का यह पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को एक टीवी इंटरव्यू में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना के संकेत दिए थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री को दोबारा पत्र लिखकर परिसीमन के मुद्दे पर व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श की मांग की है। उनका कहना है कि इतना महत्वपूर्ण संवैधानिक विषय जल्दबाजी में आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
खरगे ने 16 जुलाई के पत्र का किया जिक्र
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने नए पत्र में बताया कि वह इससे पहले 16 जुलाई 2026 को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख चुके हैं। उस पत्र में उन्होंने परिसीमन संबंधी सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों को प्रस्ताव का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग रखी थी, ताकि किसी विशेष सत्र में इसे पेश करने से पहले सभी पक्ष अपनी राय तैयार कर सकें।
लोकसभा की 543 सीटें बरकरार रखने की मांग
खरगे ने कांग्रेस के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी चाहती है कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखी जाए। उनके अनुसार, सीटों की संख्या में बदलाव का देश की राजनीति और राज्यों के प्रतिनिधित्व पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों के साथ विस्तृत चर्चा जरूरी है।
राज्यों की मौजूदा सीटों में बदलाव नहीं हो
कांग्रेस अध्यक्ष ने दूसरी प्रमुख मांग यह रखी कि लोकसभा में राज्यों को वर्तमान में आवंटित सीटों की संख्या भी अगले 25 वर्षों तक कायम रखी जाए। उनका तर्क है कि परिसीमन के दौरान राज्यों के प्रतिनिधित्व में संभावित बदलाव को लेकर सभी पक्षों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। खरगे ने कहा कि इस प्रक्रिया में राज्यों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
2029 से महिलाओं को मिले एक-तिहाई आरक्षण
खरगे ने अपनी तीसरी मांग के तौर पर कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने परिसीमन और महिला आरक्षण को एक-दूसरे से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक विषयों के रूप में देखने की जरूरत बताई। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था को जल्द लागू किया जाना चाहिए।
16-17 अप्रैल की घटनाओं का भी जिक्र
खरगे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि परिसीमन जैसे गंभीर विषय पर जल्दबाजी या दबाव की स्थिति नहीं बननी चाहिए। उन्होंने अपने पत्र में 16 और 17 अप्रैल 2026 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को प्रस्ताव पर विचार करने का उचित अवसर देने पर जोर दिया।
अप्रैल में विधेयक को नहीं मिला था जरूरी बहुमत
गौरतलब है कि 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया था, लेकिन आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण यह पारित नहीं हो सका। मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया था। अब परिसीमन को लेकर कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक चर्चा फिर तेज होती दिखाई दे रही है।
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