उदयपुर (सरगुजा) @thetarget365 सरगुजा जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र में हरे-भरे जंगलों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। परसा ईस्ट केते बासेन (PEKB) कोल परियोजना के लिए विगत कुछ वर्षों से लगातार जंगलों को काटा जा रहा है। इसके बावजूद, एक और कोल परियोजना PCB के लिए भी एक राउंड की कटाई हो चुकी है और यह परियोजना द्रुत गति से आगे बढ़ रही है।
इसके अलावा, केते एक्सटेंशन कोल परियोजना के लिए भी जंगलों में पेड़ों पर मार्किंग की जा रही है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में हजारों और पेड़ काटे जाएंगे। इन परियोजनाओं के तहत लाखों पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं, और लाखों की कटाई की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बेतहाशा पेड़ों की कटाई से पर्यावरण का असंतुलन बढ़ेगा, जिससे गर्मियों में अप्रत्याशित वृद्धि होगी। साथ ही, जंगलों के खत्म होने से आसपास के गांवों में धूल और धुएं की समस्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय लोगों में श्वसन और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
इन परियोजनाओं में सिर्फ जंगलों की कटाई ही एकमात्र समस्या नहीं है। स्थानीय ग्रामीण अपने घर, जमीन और बाग-बगीचों के उचित मुआवजे न मिलने के कारण भी परेशान हैं। लोगों को विस्थापन और अपने जीवन-यापन के लिए नई जगहों की तलाश में संघर्ष करना पड़ रहा है।
कोरबा से तारा और प्रेमनगर-उदयपुर का इलाका हाथियों का बड़ा रहवास क्षेत्र माना जाता है। जाहिर है उस क्षेत्र में हजारों पेड़ों की बलि के बाद इनका रहवास प्रभावित होगा। यही कारण है कि पिछले कुछ समय से इस इलाके में जंगल उजड़ने के बाद हाथी ज्यादा उग्र हो गए हैं। वे अब मानव आबादी की ओर ज्यादा प्रवेश कर रहे हैं। इसके चलते हाथी मानव संघर्ष की स्थिति बढ़ती जा रही है।
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