Devdutt Padikkal Century : भारत के युवा टॉप ऑर्डर बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट में शानदार शतक लगाकर अपनी वापसी को यादगार बना दिया। पडिक्कल ने 9 चौके और 1 छक्के की मदद से टेस्ट करियर का पहला शतक पूरा किया। यह उनके टेस्ट करियर का केवल तीसरा मुकाबला है। अपनी शतकीय पारी के दौरान उन्होंने न सिर्फ धैर्य और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि तीन अहम रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए।


जायसवाल के आउट होने के बाद संभाली पारी
देवदत्त पडिक्कल भारतीय पारी के दौरान यशस्वी जायसवाल के विकेट के बाद तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे। शुरुआत में उन्होंने बेहद संयमित अंदाज में बल्लेबाजी की और परिस्थितियों के अनुसार अपना खेल आगे बढ़ाया। पडिक्कल ने खराब गेंदों का इंतजार किया और उन्हें बाउंड्री तक पहुंचाया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पारी को मजबूत किया और आखिरकार टेस्ट क्रिकेट में अपना पहला शतक पूरा कर लिया।

नंबर तीन पर शतक लगाने वाले बाएं हाथ के भारतीय बल्लेबाज
पडिक्कल के शतक के साथ भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में नंबर तीन पर शतक लगाने वाले बाएं हाथ के बल्लेबाजों की सूची में उनका नाम भी शामिल हो गया है। इस स्थान पर सबसे ज्यादा चार शतक विनोद कांबली ने लगाए हैं। सौरव गांगुली के नाम तीन शतक हैं। वहीं सलीम दुरानी, बापू नाडकर्णी, अजीत वाडेकर, एकनाथ सोलकर और सुरिंदर अमरनाथ ने नंबर तीन पर एक-एक शतक लगाया है। अब देवदत्त पडिक्कल भी इस खास सूची में शामिल हो गए हैं।
21वीं सदी में नंबर तीन पर दूसरा लेफ्टी शतकवीर
पडिक्कल ने एक और खास उपलब्धि हासिल की। वह 21वीं सदी में भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में नंबर तीन पर शतक लगाने वाले केवल दूसरे बाएं हाथ के बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि सौरव गांगुली के नाम थी। गांगुली ने साल 2002 में जिम्बाब्वे के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में 136 रन की शानदार पारी खेली थी। करीब 24 साल के लंबे अंतराल के बाद पडिक्कल ने इस रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया।
19 टेस्ट के बाद तीसरे नंबर पर आया शतक
भारतीय टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट में नंबर तीन पर शतक लगाने वाले आखिरी बल्लेबाज शुभमन गिल थे। उन्होंने सितंबर 2024 में चेन्नई में बांग्लादेश के खिलाफ शतक लगाया था। इसके बाद भारत ने अगले 19 टेस्ट मुकाबलों में तीसरे नंबर पर सात अलग-अलग बल्लेबाजों को मौका दिया। इन बल्लेबाजों ने कुल 35 पारियों में औसतन 27.28 रन बनाए और पांच बार 50 से अधिक का स्कोर किया। अब पडिक्कल ने इस लंबे इंतजार को खत्म करते हुए नंबर तीन पर शतक लगाया।

करीब दो साल बाद टेस्ट टीम में वापसी
पडिक्कल की टेस्ट क्रिकेट में वापसी भी उनके लिए खास रही। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने लंबे अंतराल के बाद टेस्ट फॉर्मेट में दोबारा कदम रखा। इससे पहले उन्होंने भारत के लिए नवंबर 2024 में टेस्ट मैच खेला था। उस मुकाबले में उन्होंने दोनों पारियों में क्रमशः शून्य और 25 रन बनाए थे। इसके बाद उन्हें दोबारा टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए इंतजार करना पड़ा।
मौके को शतक में बदला
लंबे समय बाद मिले अवसर को देवदत्त पडिक्कल ने पूरी तरह भुनाया। तीसरे टेस्ट में ही शतक लगाकर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी क्षमता का मजबूत परिचय दिया। उनके इस प्रदर्शन से टीम में मध्यक्रम और टॉप ऑर्डर के विकल्पों को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। गॉल की परिस्थितियों में धैर्य के साथ खेलते हुए पडिक्कल ने अपनी तकनीक और मानसिक मजबूती दिखाई।
पहले टेस्ट में यादगार प्रदर्शन
पडिक्कल का यह शतक उनके टेस्ट करियर के लिए बड़ा मोड़ माना जा सकता है। सिर्फ तीसरे टेस्ट में पहला शतक लगाने के साथ उन्होंने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए और भारतीय टेस्ट टीम में अपनी दावेदारी मजबूत की। अब उनके प्रदर्शन पर क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें बनी हुई हैं। गॉल टेस्ट में उनकी शतकीय पारी ने लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में लौटने की कहानी को यादगार बना दिया है।











