Tipu Sultan Controversy
Tipu Sultan Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से महापुरुषों की तुलना को लेकर जारी घमासान अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। कांग्रेस द्वारा टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से किए जाने के बाद पैदा हुए विवाद पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में अपनी चुप्पी तोड़ी है। राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने अत्यंत आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि महापुरुषों के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और महाराष्ट्र की अस्मिता के साथ खिलवाड़ करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने सदन में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार की मूल आपत्ति किस बात पर है। उन्होंने कहा, “हमारी बहस इस पर नहीं है कि टीपू सुल्तान अच्छे थे या बुरे, उस पर शोधकर्ता चर्चा कर सकते हैं। लेकिन हमारी कड़ी आपत्ति इस दावे पर है कि टीपू सुल्तान, छत्रपति शिवाजी महाराज जितने ही महान राजा थे।” फडणवीस ने जोर देकर कहा कि शिवाजी महाराज का स्थान अद्वितीय है; उनका स्वराज्य, सुशासन और नैतिकता का आदर्श विश्व भर में मिसाल है। जब कोई यह कहता है कि टीपू सुल्तान का गुणगान भी शिवाजी महाराज के समान होना चाहिए, तो यह न केवल इतिहास का अपमान है बल्कि करोड़ों शिवभक्तों की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है।
इतिहास की सच्चाई को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री ने टीपू सुल्तान के शासनकाल के उन पहलुओं पर प्रकाश डाला जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के इतिहास से गायब रखा गया। फडणवीस ने कहा कि दुर्भाग्यवश दशकों तक इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि टीपू सुल्तान को महान बताने के चक्कर में यह तथ्य छिपाया गया कि उन्होंने 75 हजार हिंदुओं का कत्ल किया था। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि टीपू सुल्तान अंग्रेजों से लड़े जरूर थे, लेकिन वह संघर्ष किसी राष्ट्रभक्ति की भावना से नहीं, बल्कि अपनी सत्ता और राज बचाने के लिए था। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जनता के सामने सही और निष्पक्ष इतिहास रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधारों की जमकर सराहना की। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 70 सालों से देश के बच्चों को गलत प्राथमिकताएं सिखाई गईं। एनसीईआरटी (NCERT) के पुराने पाठ्यक्रमों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पहले मुगल साम्राज्य के लिए 17 पन्ने समर्पित किए जाते थे, जबकि छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को मात्र एक पैराग्राफ में समेट दिया जाता था। फडणवीस ने गर्व से घोषणा की कि वर्तमान सरकार ने इस असंतुलन को ठीक करते हुए अब मराठा साम्राज्य और शिवाजी महाराज के इतिहास को 20 पन्नों का विस्तृत स्थान दिया है।
अपने संबोधन के समापन पर देवेंद्र फडणवीस ने देश के मुस्लिम नागरिकों और बाहरी आक्रांताओं के बीच एक स्पष्ट रेखा खींची। उन्होंने कहा, “यदि हमने सही समय पर सही इतिहास पढ़ा होता, तो आज इस देश का कोई भी मुसलमान औरंगजेब को अपना आदर्श नहीं मानता।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में कई राष्ट्रभक्त मुसलमान हैं, जिनका वे सम्मान करते हैं। हालांकि, उन्होंने उन लोगों को कड़ी चेतावनी दी जो देश पर आक्रमण करने वालों और दमनकारी शासकों को अपना नायक मानते हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सरकार की लड़ाई जारी रहेगी और उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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