Devi Brahmacharini Mantra 2026 : शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का यह स्वरूप तपस्या, संयम, त्याग और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। भक्त इस दिन माता की आराधना कर सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करते हैं।
कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी तप के कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। देवी का स्वरूप शांत और सौम्य माना जाता है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होने का वर्णन मिलता है। भक्त इस स्वरूप की पूजा करते हुए धैर्य, आत्मसंयम और दृढ़ इच्छाशक्ति का स्मरण करते हैं।
12 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा करने के लिए बताए गए शुभ समय इस प्रकार हैं। सुबह 6:26 से 7:53 बजे तक, सुबह 9:19 से 10:46 बजे तक, सुबह 11:50 से दोपहर 12:36 बजे तक, दोपहर 1:40 से 3:06 बजे तक और शाम 4:33 से 6:00 बजे तक पूजा की जा सकती है। ये समय उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि अवश्य करें।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
पूजा के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के साफ स्थान पर मां ब्रह्मचारिणी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल को व्यवस्थित करके दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक देवी का ध्यान करें। शुभ मुहूर्त में माता को तिलक लगाएं और फूलों की माला अर्पित करें।
देवी को चढ़ाएं ये पूजा सामग्री
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में अबीर, गुलाल, रोली, जनेऊ, सुपारी, लौंग, फूल, फल और नारियल जैसी सामग्री अर्पित की जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी को गन्ना चढ़ाना शुभ माना जाता है। यदि गन्ना उपलब्ध न हो, तो गुड़ या शक्कर का भोग लगाया जा सकता है। पूजा करते समय श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखें।
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
पूजा के दौरान मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप किया जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं।
मंत्र 1:
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मंत्र 2:
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
धार्मिक विश्वास है कि मंत्र जाप से मन को एकाग्र करने और पूजा में ध्यान लगाने में सहायता मिलती है।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
मंत्र जाप के बाद मां ब्रह्मचारिणी की आरती श्रद्धापूर्वक करें। आरती की शुरुआत इन पंक्तियों से होती है:
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥
आरती में भक्त देवी की महिमा का गुणगान करते हुए ज्ञान, सुख और आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं। आरती पूरी होने के बाद माता को भोग लगाएं और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।
पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान
पूजा के दौरान शांत मन रखें और अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा का पालन करें। पूजा सामग्री उपलब्ध न होने पर अनावश्यक चिंता करने के बजाय श्रद्धा से प्रार्थना करें। नवरात्रि में मां ब्रह्मचारिणी की आराधना को तप, धैर्य और आत्मविश्वास का संदेश देने वाला माना जाता है।
धार्मिक जानकारी से जुड़ा जरूरी डिस्क्लेमर
यह लेख धार्मिक ग्रंथों, परंपराओं और उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त को लेकर अलग-अलग पंचांगों या परंपराओं में अंतर हो सकता है। पाठक इसे धार्मिक एवं सूचनात्मक जानकारी के रूप में लें।
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