LPG Crisis
LPG Crisis: मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से भारत में भी एलपीजी (LPG) यानी रसोई गैस की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। इस गहराते ऊर्जा संकट के बीच मथुरा के प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का एक दिलचस्प बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने देशवासियों को आधुनिक संसाधनों पर निर्भरता कम करने और अपनी जड़ों की ओर लौटने की सलाह दी है। देवकीनंदन ठाकुर का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा चला, तो इंसान को एक बार फिर पुराने दौर की जीवनशैली अपनानी पड़ सकती है।
अपने भक्तों को संबोधित करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने मिट्टी के चूल्हे पर बने खाने के अनगिनत फायदे गिनाए। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “गैस सिलेंडर के लिए मारामारी मची है। मुझे तो लगता है कि अगर दो-तीन साल हालात ऐसे ही रहे, तो हम लौटकर सतयुग में पहुंच जाएंगे और फिर से चूल्हे पर ही रोटियां बनेंगी।” उन्होंने माताओं-बहनों से आग्रह किया कि वे चूल्हे के धुएं को एक समस्या न मानें, क्योंकि इसके बदले मिलने वाला भोजन स्वास्थ्यवर्धक होता है। उन्होंने आधुनिक जीवनशैली पर तंज कसते हुए कहा कि आज के पुरुषों में पहले जैसा ‘दम’ नहीं रहा है; जैसे गैस की रोटी फूलती है, वैसे ही आज का इंसान भी फूल रहा है।
कथावाचक ने वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तर्कों का मेल बिठाते हुए कहा कि चूल्हे की अग्नि में कोई दोष नहीं होता, लेकिन गैस की आग से बनी रोटी में ‘दुर्गुण’ आ ही जाते हैं। उन्होंने अंदेशा जताया कि प्रकृति अपना खेल खेल रही है। देवकीनंदन ठाकुर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “जब दुनिया के गैस भंडारों में आग लग जाएगी, तो आप गैस कहां से लाओगे? उस स्थिति में सरसों की लकड़ियों और कंडों (उपलों) के दाम भी आसमान छूने लगेंगे।” उनका यह बयान वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए आत्मनिर्भर बनने की ओर इशारा करता है।
देवकीनंदन ठाकुर ने गाय के महत्व को गैस संकट से जोड़ते हुए कहा कि जो लोग आज गायों को सड़कों पर छोड़ रहे हैं, वे ही कल गैस न होने पर गाय से ‘गोबर’ की गुहार लगाएंगे ताकि उपले (कंडे) बनाए जा सकें। उन्होंने भगवान कृष्ण (बंसी वाले) से प्रार्थना करते हुए कहा कि शायद यह सब उनकी ही लीला है ताकि मनुष्य फिर से प्रकृति और पशुधन के महत्व को समझ सके। उनके अनुसार, आने वाले समय में कंडे और लकड़ियां ही ऊर्जा के प्रमुख स्रोत बन सकते हैं, इसलिए हमें अपनी पारंपरिक संस्कृति का सम्मान करना चाहिए।
हालांकि, भारत सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि देश में एलपीजी और अन्य ईंधनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घबराने की कोई बात नहीं है। लेकिन, मिडिल ईस्ट में जिस तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) और प्रमुख तेल बंदरगाह युद्ध की चपेट में हैं, उससे भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। देवकीनंदन ठाकुर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लोग महंगाई और आपूर्ति में कमी के डर से वैकल्पिक रास्तों के बारे में सोचने लगे हैं। उनकी यह ‘चूल्हा नीति’ अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गई है।
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