Global Crash
Global Crash: मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में एक बार फिर डर और अनिश्चितता का माहौल व्याप्त हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा संबोधन ने उन निवेशकों की उम्मीदों को करारा झटका दिया है, जो जल्द ही शांति बहाली की आस लगाए बैठे थे। ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अमेरिका अगले 2 से 3 हफ्तों के भीतर ईरान पर बेहद सख्त सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इस आक्रामक रुख के सामने आते ही वैश्विक शेयर बाजारों में भारी बिकवाली शुरू हो गई और सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशकों ने इक्विटी से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी का सबसे त्वरित और गहरा असर एशियाई बाजारों पर देखने को मिला। गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 की सुबह एशियाई शेयर सूचकांकों में 1.4% से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जापान के निक्केई से लेकर हांगकांग के हैंग सेंग तक, सभी प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। केवल एशिया ही नहीं, बल्कि अमेरिकी फ्यूचर्स में भी लगभग 1% की कमजोरी देखी गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के ‘हॉकिश’ (आक्रामक) रुख ने युद्ध विराम की उन तमाम संभावनाओं पर पानी फेर दिया है, जिनकी चर्चा पिछले कुछ दिनों से हो रही थी।
जैसे-जैसे युद्ध की आशंका बढ़ रही है, ऊर्जा बाजार में भी उबाल देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 4.2% की भारी उछाल के साथ $105 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि इससे माल ढुलाई और उत्पादन की लागत बढ़ेगी, जिससे अंततः वैश्विक महंगाई में इजाफा होगा। यदि तनाव लंबे समय तक खिंचता है, तो विश्लेषकों का अनुमान है कि तेल की कीमतें $120 के स्तर को भी छू सकती हैं।
वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में निवेशक जोखिम भरे शेयर बाजार के बजाय सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कारण अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में हलचल तेज हो गई है। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.36% तक पहुंच गई है। बॉन्ड यील्ड में यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि निवेशक भविष्य को लेकर आशंकित हैं और वे अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका सीधा दबाव शेयर बाजारों की तरलता पर पड़ रहा है।
इस पूरे भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र में ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का मुद्दा सबसे अहम बनकर उभरा है। दुनिया के कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। ईरान द्वारा इस रास्ते को बंद करने या बाधित करने की धमकी ने सप्लाई चेन विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यदि यह मार्ग अवरुद्ध होता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है, जिससे न केवल तेल बल्कि गैस की कीमतों में भी बेतहाशा वृद्धि होने की आशंका है।
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि बातचीत के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं, लेकिन उनका लहजा और सैन्य तैयारियों के संकेत बाजार को आश्वस्त नहीं कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है। लगातार बढ़ती अनिश्चितता निवेशकों के भरोसे को तोड़ रही है, जिससे आने वाले समय में शेयर बाजारों में और अधिक उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है।
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