DGHS Medical Scam : दिल्ली के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय यानी DGHS से जुड़े कथित मेडिकल खरीद घोटाले में एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने राउज एवेन्यू कोर्ट में करीब 12 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी ने इस मामले में पूर्व DGHS महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल, डॉ. विनोद कुमार रंगा और नीरज चोपड़ा को आरोपी बनाया है। मामले में अदालत की कार्यवाही के दौरान तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में पेश किया गया।
तीनों आरोपियों को अदालत में किया गया पेश
अदालत के 16 सितंबर के आदेश के मुताबिक डॉ. विनोद कुमार रंगा और नीरज चोपड़ा को न्यायिक हिरासत से कोर्ट के सामने पेश किया गया। वहीं पूर्व DGHS महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल को भी न्यायिक हिरासत में अदालत के समक्ष पेश किया गया। एसीबी की ओर से दाखिल चार्जशीट में कथित भ्रष्टाचार और मेडिकल सामग्री की खरीद से संबंधित आरोपों को विस्तार से शामिल किया गया है।
मेडिकल उपकरणों की खरीद और सप्लाई में अनियमितता का आरोप
एसीबी के अनुसार पूरा मामला मेडिकल उपकरणों सहित विभिन्न प्रकार की मेडिकल सामग्री की खरीद और सप्लाई में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने इस कथित घोटाले की रकम करीब 700 करोड़ रुपये बताई है। चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7A, 13(1) और 13(2) के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत लगाए गए आरोप
चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 316(5), 318(4) और 238 का भी उल्लेख किया गया है। एसीबी का आरोप है कि मेडिकल सामान की खरीद प्रक्रिया में कथित तौर पर ऐसी अनियमितताएं हुईं, जिनसे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। जांच में खरीद प्रक्रिया, सप्लाई और उससे जुड़े दस्तावेजों को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है।
अभियोजन की मंजूरी का मामला अभी लंबित
मामले की सुनवाई के दौरान एसीबी के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत आवश्यक मंजूरी मांगी जा चुकी है। हालांकि, सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी अभी प्राप्त नहीं हुई है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि मंजूरी मिलते ही संबंधित दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड में दाखिल कर दिए जाएंगे।
30 सितंबर को होगी चार्जशीट पर अगली सुनवाई
अदालत ने चार्जशीट से जुड़े दस्तावेजों की जांच के लिए अपने अहलमद को भी निर्देश दिया है। उसे अगली सुनवाई में यह रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी कि चार्जशीट के साथ दाखिल किए गए दस्तावेज दस्तावेजों की सूची के अनुरूप हैं या नहीं। मामले में चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
जून 2026 में दर्ज हुई थी एफआईआर
यह मामला जून 2026 में उस समय सामने आया, जब दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर एंटी-करप्शन ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की। प्राथमिकी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने मेडिकल खरीद और सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों तथा प्रक्रिया की जांच शुरू की।
GeM और ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में लूपहोल्स के इस्तेमाल का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार कथित अनियमितताओं में सरकारी डिजिटल खरीद व्यवस्था से जुड़े प्लेटफॉर्म और ई-टेंडरिंग प्रक्रिया की कमियों का फायदा उठाए जाने की आशंका सामने आई। आरोप है कि GeM पोर्टल और ई-टेंडरिंग से संबंधित प्रक्रियाओं में मौजूद लूपहोल्स का इस्तेमाल करके मेडिकल सामान की खरीद में गड़बड़ी की गई।
बाजार कीमत से कई गुना अधिक दाम पर खरीद का आरोप
जांच में मेडिकल सामान को कथित तौर पर बाजार कीमत से काफी अधिक दरों पर खरीदे जाने के उदाहरण भी सामने आए हैं। एजेंसी के अनुसार करीब 10 लाख रुपये की बाजार कीमत वाली पोर्टेबल एक्स-रे मशीन को 33 लाख रुपये में बिल किए जाने का आरोप है। इसी तरह 150 रुपये की बेडशीट 450 रुपये और लगभग ढाई रुपये का ORS घोल 15 रुपये में खरीदे जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।
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