Dhankhar July Dinner: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ अब केंद्र सरकार पर ‘साफ-संकेत’ देने के लिए विदाई रात्रिभोज की योजना बना रहा है। अप्रैल में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के भारत दौरे पर रात्रिभोज को लेकर उपजे विवाद के जवाब में विपक्ष अब प्रतीकात्मक रूप से ‘जुलाई रात्रिभोज’ की तैयारी कर रहा है।
सोमवार को धनखड़ ने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, लेकिन उसी दिन तक वे राज्यसभा में सक्रिय और सामान्य रूप से मौजूद थे। शाम को अचानक पद छोड़ने के फैसले ने राजनीतिक हलकों को चौंका दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अगले दिन इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया। इसके बाद से ही केंद्र और धनखड़ के बीच कथित मतभेदों की अटकलें जोर पकड़ने लगीं।
राजनीतिक विश्लेषक और विपक्षी नेता अप्रैल 2024 की उस घटना को इस इस्तीफे से जोड़कर देख रहे हैं, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन उपराष्ट्रपति की बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। संवैधानिक प्रोटोकॉल के अनुसार, भारत आने वाले उपराष्ट्रपति का स्वागत रात्रिभोज उपराष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। ऐसे में उस आयोजन में धनखड़ की ‘अनदेखी’ को कई विपक्षी नेताओं ने ‘संदेश’ की तरह देखा।
अब जब धनखड़ ने पद छोड़ दिया है, तो विपक्ष उनके सम्मान में एक विदाई रात्रिभोज आयोजित करने पर विचार कर रहा है। यह आयोजन केवल एक ‘सम्मान समारोह’ न होकर मोदी सरकार को घेरने और संकेत देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसे लेकर शुक्रवार तक विपक्षी नेताओं में चर्चा जारी थी, लेकिन किसी अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं हुई थी।
गुरुवार को राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के दौरान कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या धनखड़ के लिए कोई औपचारिक विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा? इस पर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। इसके बाद ही विपक्षी दलों के बीच रात्रिभोज का विचार और तेज हो गया।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ कांग्रेस सांसदों ने विपक्षी खेमे के नेताओं के साथ इस संभावित आयोजन को लेकर बातचीत शुरू कर दी है। इसे कुछ लोग ‘जुलाई रात्रिभोज’ नाम से बुला रहे हैं— जो अप्रैल के ‘अपमान’ का जवाब माना जा रहा है। इस आयोजन से विपक्ष, केंद्र सरकार को एक तरह का सियासी संदेश देना चाहता है।
अगर यह रात्रिभोज आयोजित होता है और जगदीप धनखड़ उसमें शिरकत करते हैं, तो यह मोदी सरकार और धनखड़ के बीच वास्तविक दूरी की ओर संकेत हो सकता है। अगर वह अनुपस्थित रहते हैं, तो भी विपक्ष को सरकार के रुख पर सवाल उठाने का अवसर मिलेगा।
धनखड़ के इस्तीफे के पीछे की वजह चाहे जो हो, लेकिन अब यह राजनीतिक प्रतीकवाद का केंद्र बन चुका है। यदि विपक्ष ‘जुलाई रात्रिभोज’ का आयोजन करता है, तो यह भारतीय राजनीति में एक नई परंपरा की शुरुआत और सत्ता-विपक्ष के बीच संवैधानिक संकेतों की सियासत का नया अध्याय साबित हो सकता है।
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