Dhirendra Shastri
Dhirendra Shastri : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने बयानों के कारण विवादों के घेरे में हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके गुरु समर्थ रामदास स्वामी के संबंधों को लेकर की गई एक टिप्पणी ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। चौतरफा घिरने के बाद शास्त्री ने नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने बयान पर सफाई दी और माफी मांग ली। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बावजूद राजनीतिक दलों और मराठा संगठनों का गुस्सा शांत होता नहीं दिख रहा है।
विवाद बढ़ता देख धीरेंद्र शास्त्री ने रविवार को नागपुर में पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। शास्त्री ने स्पष्ट किया, “छत्रपति शिवाजी महाराज का स्थान मेरे लिए सर्वोच्च है। उनके बारे में नकारात्मक सोचना तो दूर, मैं सपने में भी ऐसा नहीं कर सकता।” उन्होंने तर्क दिया कि वे केवल एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति अटूट निष्ठा का उदाहरण दे रहे थे। उन्होंने अपनी बात को महाभारत के अर्जुन और कृष्ण के प्रसंग से जोड़ते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल शिवाजी महाराज की संतों के प्रति भक्ति को उजागर करना था।
विवाद की शुरुआत नागपुर के एक कार्यक्रम से हुई, जहाँ शास्त्री ने दावा किया कि शिवाजी महाराज युद्धों से थक गए थे और अपनी जिम्मेदारियां छोड़ना चाहते थे। शास्त्री के अनुसार, महाराज अपना मुकुट लेकर समर्थ रामदास के पास पहुंचे और उसे उनके चरणों में रख दिया, जिसे गुरु ने पुनः उनके सिर पर रखकर उन्हें सेवा का पाठ पढ़ाया। इतिहासकारों और राजनीतिक नेताओं ने इस दावे को पूरी तरह काल्पनिक और अपमानजनक बताया है। उनका तर्क है कि शिवाजी महाराज एक संप्रभु और स्वाभिमानी शासक थे, जिन्होंने कभी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा।
पूर्व राज्यसभा सदस्य संभाजीराजे छत्रपति ने शास्त्री के ऐतिहासिक ज्ञान पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘पाखंडी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि शास्त्री को अपने ही राज्य मध्य प्रदेश का इतिहास पता नहीं है, जहाँ के योद्धा छत्रसाल बुंदेला ने शिवाजी महाराज से प्रेरणा लेकर मुगलों को हराया था। कांग्रेस और शिवसेना (UBT) ने इसे इतिहास को विकृत करने की गहरी साजिश बताया है। संजय राउत ने इसे ‘ऐतिहासिक पाप’ करार देते हुए सरकार पर ऐसे बयानों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। वहीं, एनसीपी (शरद पवार गुट) ने शास्त्री के महाराष्ट्र प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
इस विवाद पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इतिहास की किसी भी प्रमाणित किताब में ऐसा कोई प्रसंग नहीं मिलता जहाँ शिवाजी महाराज ने अपना राज्य त्यागने की बात कही हो। फडणवीस ने सभी सार्वजनिक हस्तियों से इतिहास के प्रति जिम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील की। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे पर फडणवीस और नितिन गडकरी से भी माफी की मांग कर रहा है क्योंकि यह बयान उनके गृह नगर और उनकी मौजूदगी वाले कार्यक्रमों के इर्द-गिर्द चर्चा में रहा।
उसी कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने एक और विवादित बयान देते हुए कहा था कि हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने चाहिए और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को समर्पित करना चाहिए। इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनके कहने का अर्थ बच्चों को राष्ट्रवादी और सनातनी विचारधारा का बनाना था। इसी दौरान उन्होंने अपने भविष्य के विवाह की योजना पर भी बात की और कहा कि वे स्वयं भी हिंदू आबादी बढ़ाने में अपना योगदान देंगे। इन बयानों ने भी सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
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