Darjeeling Landslide: दार्जिलिंग और उत्तर बंगाल के अन्य हिस्सों में हाल ही में हुई भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन आपदाओं पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने राज्य सरकार, विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) को आड़े हाथों लिया है।

घोष ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि उत्तर बंगाल में आई बाढ़ और भूस्खलन के लिए TMC सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्षों से नालों और नदियों की सफाई नहीं कराई, जिससे जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

“टीएमसी ने जमीन पर अतिक्रमण कर उसे बेच दिया”
घोष ने आरोप लगाया कि टीएमसी नेताओं ने जमीन पर अतिक्रमण कर उसे लोगों को बेचा, जिससे प्राकृतिक जल मार्ग बाधित हो गए। इसका नतीजा यह हुआ कि थोड़ी सी बारिश में भी पूरा उत्तर बंगाल जलमग्न हो जाता है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “दार्जिलिंग में भूस्खलन हुआ है, लोग मर रहे हैं, घर बह गए हैं, लेकिन राज्य सरकार को फुर्सत नहीं। यहां कार्निवल हो रहा है और वहां लोग बह रहे हैं।”
“मुख्यमंत्री सिर्फ तस्वीरें खिंचवाती हैं”
दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री हर जगह जाकर सिर्फ तस्वीरें खिंचवाती हैं। वे हर आपदा के बाद केंद्र सरकार से पैसा मांगती हैं। फिर एक नया आंदोलन शुरू होता है कि दिल्ली ने पैसा नहीं दिया। लेकिन खुद उनकी कोई जवाबदेही नहीं होती।”
उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ता आपदा प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद कर रहे हैं, जबकि सरकार और प्रशासन का कहीं अता-पता नहीं है।
“उत्तर बंगाल में सरकार नदारद, जनता परेशान”
घोष का कहना है कि उत्तर बंगाल के लोग आज असहाय हैं, और सरकार जमीनी स्तर पर कोई राहत कार्य नहीं कर रही। उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि विपदा की इस घड़ी में उनका प्रशासन कहां है?
दिलीप घोष के इस बयान से राज्य की राजनीति में नया मोड़ आ गया है, क्योंकि इससे पहले भी भाजपा और टीएमसी के बीच कई मुद्दों पर टकराव देखा गया है।दार्जिलिंग और उत्तर बंगाल में प्राकृतिक आपदा के बीच दिलीप घोष का यह बयान राजनीतिक गर्मी को और बढ़ा रहा है। एक ओर जहां जनता राहत और मदद की अपेक्षा कर रही है, वहीं दूसरी ओर सियासी बयानबाजी भी तेज हो चुकी है।
दिलीप घोष का यह बयान केंद्र और राज्य सरकार के बीच राहत कोष के मुद्दे पर भी बहस को जन्म दे सकता है। अब देखना यह है कि टीएमसी इस आरोप का क्या जवाब देती है और राज्य सरकार इस आपदा में वास्तविक राहत के लिए क्या कदम उठाती है।











