Dilip Ghosh Kalighat
Dilip Ghosh Kalighat: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी पारा अपने चरम पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बंगाल दौरे के बीच राज्य सरकार की मंत्री शशि पांजा के आवास पर हुए हमले ने राज्य में हलचल पैदा कर दी है। शशि पांजा ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर उन्हें जान से मारने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी के स्टार प्रचारक मिथुन चक्रवर्ती द्वारा मंच से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ‘ICU’ में भेजने वाले बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बंगाल का चुनाव अब राजनीतिक मर्यादाओं को लांघकर व्यक्तिगत हमलों और शारीरिक धमकियों के दौर में प्रवेश कर चुका है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने रविवार को अपने मॉर्निंग वॉक के बाद जो बयान दिए, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कोलकाता के इको पार्क के पास पत्रकारों से बात करते हुए घोष ने कहा कि बीजेपी को टीएमसी को हराने के लिए बाहरी लोगों की जरूरत नहीं है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि लड़ाई शुरू हो चुकी है और अब पीछे हटने का समय नहीं है। दिलीप घोष का यह लहजा उनके पुराने आक्रामक अंदाज की याद दिलाता है, जिसने बंगाल की सड़कों पर अक्सर सियासी तनाव पैदा किया है।
दिलीप घोष ने शशि पांजा के घर पर हुए हमले को ‘ड्रामा’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब टीएमसी नेता सुदीप बनर्जी को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था, तब भी ऐसी ही भीड़ जुटाकर पार्टी ऑफिस में तोड़फोड़ की गई थी। घोष के अनुसार, शशि पांजा खुद भीड़ के साथ बस पर पत्थर फेंक रही थीं और अब सहानुभूति बटोरने के लिए हमले का आरोप लगा रही हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर टीएमसी कार्यकर्ता सावधान नहीं रहे, तो उन्हें इस बार न केवल सिर पर, बल्कि शरीर के कई अन्य हिस्सों पर पट्टियां बांधनी पड़ेंगी। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि वह ‘बम और बंदूकें’ लाएंगे, जो कि एक बेहद विवादित बयान माना जा रहा है।
दिलीप घोष ने प्रधानमंत्री मोदी के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास’ का जिक्र करते हुए ‘हिसाब’ शब्द की नई व्याख्या की। उन्होंने कहा कि हिसाब केवल पैसों का नहीं होगा, बल्कि अब तक की गई हर गुंडागर्दी का होगा। घोष ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के आवास की ओर इशारा करते हुए कहा, “अगर शशि पांजा के घर पर हमला हो सकता है, तो कालीघाट (ममता बनर्जी का निवास) पर भी हमला हो सकता है।” उन्होंने मदन मित्रा और चेतला जैसे इलाकों का नाम लेते हुए कहा कि बीजेपी अब ईंट का जवाब पत्थर से देगी। उन्होंने पुरानी घटनाओं को याद दिलाते हुए कहा कि जब जेपी नड्डा पर हमला हुआ था, तब बीजेपी ने संयम रखा था, लेकिन अब वे टीएमसी को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।
बंगाल विधानसभा चुनाव की 26 तारीख की लड़ाई बीजेपी के लिए ‘करो या मरो’ जैसी स्थिति है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा दी जा रही ये धमकियां उनकी संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक गुटबाजी को छिपाने का एक तरीका हो सकती हैं। क्या भगवा खेमा इस डर से डराने-धमकाने की राजनीति कर रहा है कि चुनाव परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं होंगे? दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा है कि बंगाल की जनता इस हिंसा और डराने वाली राजनीति का करारा जवाब देगी। बंगाल का यह चुनाव अब लोकतंत्र की परीक्षा के साथ-साथ शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा बन गया है।
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