G7 Summit : मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) के देशों में पिछले कई महीनों से जारी भारी तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते की सुगबुगाहट ने वैश्विक बाजार और कूटनीतिक गलियारों में नई उम्मीदें जगाई थीं। दोनों देशों की तरफ से आए बयानों से ऐसा आभास हो रहा था कि दशकों पुरानी तल्खी को कम करने के लिए एक बड़ा समझौता आकार ले रहा है। हालांकि, फ्रांस में आयोजित जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने पूरी दुनिया को फिर से चौंका दिया। ट्रंप ने साफ कर दिया कि ईरान के साथ फिलहाल कोई ‘समझौता ज्ञापन’ (MoU) अंतिम रूप से तैयार नहीं हुआ है, जिससे इस शांति प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं।

ट्रंप की दो टूक: ‘अगर कुछ पसंद नहीं आया तो फिर होगा हमला’
जी-7 समिट में हिस्सा लेने पहुंचे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति अपने आक्रामक तेवर बरकरार रखे। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों को अभी भी मेज पर रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका पहले ही ईरान में बहुत कुछ नष्ट कर चुका है। ट्रंप की धमकी यहीं नहीं थमी; उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उन्हें ईरान की गतिविधियों या समझौते की शर्तों में कुछ भी नापसंद आया, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बड़ा सैन्य हमला करने में संकोच नहीं करेगा। राष्ट्रपति का यह बयान शांति की उम्मीदों के बीच एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा, तेल कीमतों पर असर
समझौते और हमले की धमकी के अलावा, ट्रंप ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर भी बड़ा अपडेट दिया। उन्होंने दावा किया कि आने वाले एक या दो दिनों में होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से आवागमन के लिए खुल जाएगा। ट्रंप ने कहा कि यह मार्ग पहले से ही आंशिक रूप से खुला है, लेकिन जल्द ही यह पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि तेल की गिरती कीमतें आम लोगों की क्रय शक्ति को बढ़ाएंगी और कच्चे तेल के दाम युद्ध से पहले के स्तर से भी नीचे जा सकते हैं।
ईरान डील पर विस्तृत चर्चा की तैयारी, वैश्विक बाजार में उत्सुकता
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के साथ चल रही डील की तमाम बारीकियों और डिटेल्स पर वह जल्द ही एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विस्तार से चर्चा करेंगे। वैश्विक बाजार पर इस घटनाक्रम का व्यापक असर देखा जा रहा है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। ट्रंप के बयानों से यह स्पष्ट है कि अमेरिका ईरान को लेकर एक ‘दोहरी नीति’ अपना रहा है, जहाँ एक ओर बातचीत के दरवाजे खुले रखने की बात है, तो दूसरी ओर सैन्य ताकत के इस्तेमाल का डर भी कायम है। अब दुनिया की निगाहें उस आगामी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जिसमें ट्रंप ईरान समझौते का भविष्य तय कर सकते हैं।
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