Dongargarh Road
Dongargarh Road News: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। घुमका ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले बोटेपार से खजरी तक की लगभग ढाई किलोमीटर लंबी सड़क वर्तमान में ग्रामीणों के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। यह मार्ग कहने को तो दो गांवों को जोड़ता है, लेकिन इसकी हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि पैदल चलना भी दूभर है। ग्रामीण पिछले कई वर्षों से एक पक्की सड़क की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के स्तर पर उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं।
ग्रामीणों की मानें तो इस सड़क का इतिहास उपेक्षा की कहानी बयां करता है। स्थानीय निवासी नारायण वर्मा के अनुसार, लगभग 20-25 साल पहले जब बोटेपार और खजरी एक ही पंचायत का हिस्सा हुआ करते थे, तब इस रास्ते पर केवल गिट्टी और मुरूम डलवाया गया था। उसके बाद से आज तक इस मार्ग पर डामरीकरण या किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण कार्य नहीं हुआ। दो दशकों से अधिक समय बीत जाने के कारण गिट्टी उखड़ चुकी है और सड़क बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढों में तब्दील हो गई है।
सड़क की खराब हालत केवल आवागमन में बाधा नहीं है, बल्कि यह आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं का मुख्य कारण भी बन गई है। ग्रामीण सुशीला बाई ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि इसी सड़क के गड्ढों और कीचड़ की वजह से फिसलकर उनका पैर टूट गया था, जिसके चलते उन्हें दो महीने तक बिस्तर पर मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा। बरसात के मौसम में यह सड़क किसी दलदल जैसी हो जाती है, जहाँ पानी भरे गड्ढों के कारण गहराई का अंदाजा नहीं मिल पाता और वाहन चालक गिरकर घायल हो जाते हैं।
इस बदहाल सड़क का सबसे बड़ा खामियाजा बोटेपार के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। अपनी मेहनत की धान की फसल को पटेवा सोसाइटी तक बेचने के लिए किसानों को इसी रास्ते का उपयोग करना पड़ता है। लेकिन सड़क इतनी खराब है कि ट्रैक्टर पलटने का डर बना रहता है। मजबूरी में किसानों को घुमका होकर कई किलोमीटर का अतिरिक्त लंबा चक्कर काटना पड़ता है। इससे न केवल उनके कीमती समय की बर्बादी होती है, बल्कि डीजल और परिवहन खर्च बढ़ने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
यह विवाद तब और गहरा गया जब डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल ने विधानसभा में इस सड़क का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि बजट में शामिल होने और निविदा (टेंडर) प्रक्रिया होने के बाद भी राशि कहाँ लंबित है और काम क्यों रुका हुआ है। इसके जवाब में लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री अरुण साव ने कहा कि सड़कों की मरम्मत कर दी गई है और वर्तमान में यह ‘चलने योग्य’ है। मंत्री के इस जवाब से ग्रामीण आक्रोशित हैं, क्योंकि उनका कहना है कि जो सड़क जमीनी स्तर पर अस्तित्व में ही नहीं है, उसे कागजों में दुरुस्त कैसे बताया जा रहा है।
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि विभाग कागजों पर खानापूर्ति कर रहा है। विधायक ने सदन में जोर देकर कहा कि सड़क के चौड़ीकरण की स्वीकृति मिली थी, लेकिन बाद में राशि रोक दी गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर इस मार्ग का निरीक्षण करें ताकि उन्हें ‘चलने योग्य’ सड़क की असलियत पता चल सके। बोटेपार और खजरी के निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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