Doraemon Director Death
Doraemon Director Death: दुनियाभर के करोड़ों बच्चों और बड़ों के पसंदीदा कार्टून ‘डोरेमोन’ को अपनी कल्पना से सजाने वाले दिग्गज जापानी एनीमे निर्देशक त्सुतोमु शिबायामा (Tsutomu Shibayama) अब हमारे बीच नहीं रहे। 84 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। शिबायामा पिछले काफी समय से फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। 6 मार्च को जीवन की लंबी जंग लड़ने के बाद उनका निधन हो गया। उनके जाने से न केवल जापान बल्कि पूरी दुनिया के एनीमे प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है, क्योंकि उन्होंने नोबिता, शिज़ुका और डोरेमोन जैसे किरदारों को घर-घर में लोकप्रिय बनाया था।
त्सुतोमु शिबायामा के निधन की आधिकारिक पुष्टि उनके अपने एनीमेशन स्टूडियो ‘अजिया डो एनीमेशन वर्क्स’ (Ajia-do Animation Works) ने बुधवार को अपनी वेबसाइट पर की। आधिकारिक बयान में कहा गया, “हमारे पूर्व सीईओ त्सुतोमु शिबायामा का 6 मार्च को निधन हो गया है। शिबायामा ने 20 से अधिक वर्षों तक डोरेमोन के टीवी एनीमेशन और फिल्मों के निर्देशक के रूप में अथक परिश्रम किया। उन्होंने ‘निंतामा रानतारो’ जैसी लोकप्रिय श्रृंखलाओं का भी सफल निर्देशन किया। एनीमे उद्योग में उनके अतुलनीय योगदान के लिए हम सदैव उनके आभारी रहेंगे।”
त्सुतोमु शिबायामा का जन्म 1940 में हुआ था (विवरणों के अनुसार वह 84 वर्ष के थे)। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1963 में प्रसिद्ध ‘टोई एनिमेशन’ के साथ की थी। उनकी शुरुआती प्रतिभा ‘द गस्टी फ्रॉग’ और ‘टेन्साई बाकाबोन’ जैसी श्रृंखलाओं में देखने को मिली। 1978 में उन्होंने अपनी खुद की कंपनी ‘अजिया डो एनीमेशन वर्क्स’ की स्थापना की। शिबायामा के करियर का सबसे सुनहरा दौर 1984 से 2005 तक रहा, जब उन्होंने डोरेमोन टीवी श्रृंखला के मुख्य निर्देशक के रूप में कार्य किया। उन्होंने डोरेमोन की 22 फीचर फिल्मों का निर्देशन किया, जिसमें ‘नोबिता एंड द कैसल अंडरसी डेविल’ जैसी कल्ट क्लासिक फिल्में शामिल हैं।
शिबायामा केवल डोरेमोन तक ही सीमित नहीं थे। उन्होंने ‘चिबी मारुको-चान’, ‘निंटामा रंतारो’ और ‘कैकेसु ज़ोरोरी’ जैसे कई अन्य सफल प्रोजेक्ट्स पर भी अपनी छाप छोड़ी। उनकी कलात्मक दूरदर्शिता और कहानी कहने के अनूठे अंदाज के कारण ही आज डोरेमोन 8 से 80 वर्ष तक के लोगों का पसंदीदा बना हुआ है। एनीमे उद्योग में उनके अपार योगदान को देखते हुए, साल 2012 में जापानी सांस्कृतिक मामलों की एजेंसी ने उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार’ से सम्मानित किया था। यह पुरस्कार उनके दशकों लंबे समर्पण का प्रमाण था।
जैसे ही त्सुतोमु शिबायामा के निधन की खबर इंटरनेट पर फैली, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘RIP Legend’ और ‘#Doraemon’ ट्रेंड करने लगा। भारत सहित कई देशों के प्रशंसकों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि शिबायामा ने उन्हें एक खूबसूरत बचपन दिया है। कई लोगों ने लिखा कि डोरेमोन और नोबिता के जरिए उन्होंने हमें दोस्ती और कभी हार न मानने की जो सीख दी, वह हमेशा जीवित रहेगी।
त्सुतोमु शिबायामा का जाना एनीमेशन की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। भले ही वह शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा निर्देशित फिल्में और टीवी शो आने वाली कई पीढ़ियों का मनोरंजन करते रहेंगे। उन्होंने एनीमेशन को महज मनोरंजन से ऊपर उठाकर एक भावनात्मक अनुभव बना दिया। आज जब भी कोई बच्चा डोरेमोन का ‘बाम्बू कॉप्टर’ देखेगा, उसे शिबायामा की उस जादुई दुनिया की याद जरूर आएगी जिसने करोड़ों चेहरों पर मुस्कान बिखेरी।
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