National Film Awards : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को फिल्म उद्योग से जुड़े कलाकारों और लोकप्रिय हस्तियों से स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक उत्पादों का प्रचार नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मशहूर कलाकारों की बातों और जीवनशैली का युवाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास आयोजित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के दौरान की। इस अवसर पर उन्होंने वर्ष 2024 के लिए विभिन्न श्रेणियों में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए।
युवाओं पर सितारों के प्रभाव को रेखांकित किया
राष्ट्रपति ने कहा कि जब लोकप्रिय और सफल कलाकार स्वस्थ तथा अनुशासित जीवनशैली के लाभों की बात करते हैं, तो बड़ी संख्या में बच्चे और युवा उनसे प्रेरणा लेते हैं। इसी प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उन्होंने फिल्मी कलाकारों से ऐसे उत्पादों के विज्ञापन से दूरी बनाने का आग्रह किया, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
‘सच्चा सितारा रोशनी फैलाता है, अंधेरा नहीं’
द्रौपदी मुर्मू ने कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि प्रसिद्धि के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी भी आती है। उन्होंने कहा कि एक सच्चा स्टार वह होता है जो समाज में रोशनी फैलाता है, अंधेरा नहीं। राष्ट्रपति का यह संदेश खास तौर पर उन लोकप्रिय कलाकारों के लिए था, जिनकी सार्वजनिक छवि और विज्ञापन युवाओं के व्यवहार तथा पसंद को प्रभावित कर सकते हैं।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ज्यूरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की अपील
राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए फिल्मों का मूल्यांकन करने वाले निर्णायक मंडलों में महिलाओं की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह प्रत्येक क्षेत्रीय निर्णायक मंडल में महिलाओं की भागीदारी देखना चाहेंगी। उनके अनुसार, निर्णय प्रक्रिया में महिला दृष्टिकोण शामिल होने से किसी भी विषय को अधिक व्यापक और मानवीय नजरिए से समझने में मदद मिल सकती है।
महिला दृष्टिकोण से विकसित हो सकता है व्यापक मानवीय नजरिया
मुर्मू ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के अनुभव और दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने निर्णायक मंडलों में महिलाओं के पर्याप्त प्रतिनिधित्व की बात करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में महिला दृष्टिकोण को शामिल करने से समग्र मानवीय दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर विविध प्रतिनिधित्व से फिल्मों के मूल्यांकन की प्रक्रिया को व्यापक बनाने में मदद मिल सकती है।
छोटे कलाकारों और फिल्म इंडस्ट्री के कामगारों के सम्मान पर जोर
राष्ट्रपति ने फिल्म उद्योग की रचनात्मक अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले छोटे कलाकारों, सहायकों, श्रमिकों और अन्य कर्मचारियों के अधिकारों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने उद्योग से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे लोगों को सम्मान के साथ सामाजिक सुरक्षा भी मिले। फिल्म निर्माण में पर्दे के पीछे काम करने वाले हजारों लोगों की भूमिका को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
सामाजिक सुरक्षा को फिल्म उद्योग की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाने की अपील
राष्ट्रपति ने कहा कि फिल्म उद्योग की सफलता केवल बड़े कलाकारों और निर्माताओं से नहीं बनती, बल्कि इसमें बड़ी संख्या में तकनीकी कर्मचारी, सहायक और श्रमिक योगदान देते हैं। इसलिए उनके सम्मान, सुरक्षा और कल्याण को उद्योग की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कलाकारों और फिल्म जगत से जुड़े संगठनों से इस दिशा में संवेदनशीलता बनाए रखने का आग्रह किया।
पिछले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह की अपील भी याद दिलाई
द्रौपदी मुर्मू ने पिछले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि उस अवसर पर उन्होंने फिल्म निर्माण से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाने का आग्रह किया था। इस बार उन्होंने उम्मीद जताई कि फिल्म उद्योग उनके इन सुझावों और अनुरोधों पर गंभीरता से ध्यान दे रहा होगा।
भारतीय फिल्मों की गुणवत्ता की राष्ट्रपति ने की सराहना
राष्ट्रपति ने फिल्म कलाकारों को देश की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का प्रमुख प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि लोकप्रिय कलाकारों में नागरिकों, विशेषकर युवाओं को प्रभावित करने की अपार क्षमता है। मुर्मू ने भारतीय सिनेमा में बन रही फिल्मों की गुणवत्ता की भी सराहना की और विश्वास जताया कि भारतीय फिल्में गुणवत्ता के मामले में आगे भी विश्व स्तरीय मानक स्थापित करने की क्षमता रखती हैं।
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