Abhishek Banerjee challenge : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा प्रस्तावित वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर केंद्र और चुनाव आयोग दोनों को खुली चुनौती दी है। अभिषेक ने कहा कि अगर SIR सही है, तो लोकसभा भंग कर नए चुनाव कराए जाएं।

SIR को लेकर विपक्ष का आक्रामक रुख
इंडिया अलायंस पहले ही SIR और मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर सवाल उठा चुका है। कुछ दिन पहले विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग मुख्यालय का दौरा किया था, जिसमें उन्हें कथित रूप से प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। इस घटनाक्रम के बाद अभिषेक बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर भारत सरकार को वाकई चुनाव आयोग पर भरोसा है, तो वह नैतिकता का परिचय देते हुए लोकसभा भंग करे और SIR लागू करके नए सिरे से चुनाव कराए।”

“चुनाव आयोग खुद कह रहा है, लिस्ट ग़लत है”
अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “अगर आयोग मानता है कि पिछले चुनाव में इस्तेमाल हुई मतदाता सूची गलत थी, तो फिर उसी सूची के आधार पर बनी मौजूदा लोकसभा की वैधता पर सवाल उठता है। क्या यह देश की जनता के साथ धोखा नहीं है?”
उन्होंने चुनाव आयुक्त को चुनौती देते हुए कहा कि यदि आप वाकई निष्पक्ष हैं, तो केवल चुनिंदा राज्यों में नहीं, बल्कि पूरे देश में SIR लागू करें, और उसके बाद लोकसभा चुनाव कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि जिन वोटों के आधार पर सरकार बनी है, वे कितने सही थे।
तृणमूल का आक्रामक रुख
तृणमूल कांग्रेस, विशेषकर बंगाल में, SIR को लेकर मुखर हो गई है। पार्टी का दावा है कि मतदाता सूची में नाम हटाने, दोहराव और अन्य विसंगतियाँ बड़े पैमाने पर देखी जा रही हैं, जिससे विपक्षी दलों को नुकसान हो सकता है। TMC का कहना है कि अगर केंद्र SIR का समर्थन कर रहा है, तो उसे भी उसकी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतज़ार
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि भाजपा और चुनाव आयोग अभिषेक बनर्जी की इस चुनौती का क्या जवाब देते हैं। SIR को लेकर चल रही सियासत आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, खासकर तब जब देश में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव और फिर 2029 के आम चुनाव सामने हैं।
अभिषेक बनर्जी की इस तीखी चुनौती ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की जवाबदेही को फिर चर्चा में ला दिया है। विपक्ष की यह मांग कि पहले मतदाता सूची सुधारें, फिर चुनाव कराएं, आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
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