DU UGC protest 2026: देश के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) का नॉर्थ कैंपस शुक्रवार को अखाड़े में तब्दील हो गया। मौका था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून के समर्थन में आयोजित एक रैली का, लेकिन यह प्रदर्शन जल्द ही हिंसा और बदसलूकी की भेंट चढ़ गया। प्रदर्शन के दौरान एक महिला सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की की घटना सामने आई है। इस घटना ने कैंपस की सुरक्षा और वैचारिक मतभेदों के बीच गिरते संवाद के स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के अनुसार, एक युवा यूट्यूबर और इन्फ्लुएंसर प्रदर्शनकारियों के बीच मौजूद थी और यूजीसी कानून के विभिन्न पहलुओं पर सवाल पूछ रही थी। इसी दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि यूजीसी समर्थकों ने उसके सवालों से नाराज होकर उसे चारों तरफ से घेर लिया। पीड़िता का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल उसके साथ हाथापाई की, बल्कि उसके नाम के टाइटल पर आपत्ति जताते हुए उसकी ‘जाति’ भी पूछी। भीड़ के बीच फंसी युवती को बचाने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
इस घटना के बाद राजनीति और छात्र संगठनों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘महिला विरोधी मानसिकता’ का परिचायक बताया है। परिषद के प्रवक्ताओं ने कहा कि जो लोग महिला सशक्तिकरण का ढोंग करते हैं, उनका असली चेहरा आज सामने आ गया है। एक महिला फ्रीलांसर पत्रकार के साथ जातिगत आधार पर भेदभाव करना और उसके साथ शारीरिक बदसलूकी करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। संगठन ने मांग की है कि दोषियों की पहचान कर उन पर कठोर कार्रवाई की जाए।
बदसलूकी की घटना के बाद आक्रोशित छात्रों का एक बड़ा समूह पीड़िता के समर्थन में उतर आया। रात होते-होते मॉरिस नगर पुलिस स्टेशन के बाहर सैकड़ों छात्रों का जमावड़ा लग गया। प्रदर्शनकारी छात्र नारेबाजी करते हुए उन लोगों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे जिन्होंने महिला इन्फ्लुएंसर के साथ खींचतान की थी। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय जैसे स्थान पर किसी भी व्यक्ति, विशेषकर महिला की गरिमा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।
यह पूरा विवाद यूजीसी के एक नए एक्ट को लेकर है, जिसके समर्थन में शुक्रवार को रैली निकाली गई थी। दिलचस्प बात यह है कि इस विवादित कानून पर आगामी 19 तारीख को देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में सुनवाई प्रस्तावित है। अदालत के फैसले से पहले ही कैंपस की राजनीति सड़कों पर आ गई है। समर्थकों का मानना है कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाएगा, जबकि विरोधियों को इसमें खामियां नजर आ रही हैं। इस वैचारिक लड़ाई ने अब व्यक्तिगत हमलों का रूप ले लिया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय की इस घटना ने एक बड़ा मौलिक सवाल खड़ा कर दिया है: क्या अब सवाल पूछना खतरे से खाली नहीं है? विश्वविद्यालय परिसर तर्क-वितर्क और संवाद के लिए जाने जाते हैं, लेकिन जिस तरह से एक पत्रकार या इन्फ्लुएंसर को उसके काम के लिए निशाना बनाया गया, वह चिंताजनक है। आने वाले दिनों में विरोधी और समर्थक छात्र संगठनों के बीच यह टकराव और बढ़ने की आशंका है। फिलहाल, सबकी निगाहें पुलिसिया कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं।
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