Shabana Nisha Death
Shabana Nisha Death: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से सामने आया आत्मदाह का मामला अब केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया और मानवीय संवेदना के बीच उपजे गहरे टकराव की एक दुखद मिसाल बन गया है। 22 जनवरी 2026 को कोर्ट के आदेश पर मकान खाली कराने पहुंची पुलिस और अदालती अमले के सामने खुद को आग लगाने वाली महिला कांग्रेस कार्यकर्ता शबाना निशा उर्फ रानी (37) अब इस दुनिया में नहीं रहीं। सात दिनों तक रायपुर के डीकेएस (DKS) अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच कड़ा संघर्ष करने के बाद शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। इस खबर के बाद पचरीपारा इलाके सहित पूरे दुर्ग में शोक और तनाव की लहर दौड़ गई है।
शबाना निशा का पूरा बचपन और जवानी दुर्ग के पचरीपारा स्थित फेरू राम के मकान में बीती थी। परिजनों के मुताबिक, शबाना का उस घर से गहरा भावनात्मक लगाव था। वह पिछले लंबे समय से मकान मालिक से आग्रह कर रही थी कि वह मकान उसे बेच दे, ताकि वह वहां स्थायी रूप से रह सके। हालांकि, मकान मालिक ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसके बाद यह कानूनी लड़ाई अदालत तक जा पहुंची। कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद फैसला मकान मालिक के पक्ष में आया और अदालत ने शबाना को घर खाली करने का सख्त आदेश जारी कर दिया। यही वह आदेश था जिसने शबाना को इस खौफनाक कदम की ओर धकेला।
घटना 22 जनवरी 2026 की दोपहर करीब 2:30 बजे की है। कोर्ट वारंट और आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस बल और कोर्ट स्टाफ शबाना के घर पहुंचे थे। शुरुआती बातचीत और कागजी कार्रवाई चल ही रही थी कि शबाना अचानक कमरे के अंदर चली गई। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वह क्या करने जा रही है। उसने खुद पर मिट्टी का तेल (केरोसिन) छिड़का और माचिस जला ली। जब वह जलती हुई हालत में घर से बाहर निकली, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और स्टाफ के होश उड़ गए। अफरा-तफरी के बीच पुलिस पीछे हट गई, जबकि स्थानीय लोगों ने चादर और पानी की मदद से आग बुझाने की कोशिश की।
आग की लपटें इतनी भीषण थीं कि जब तक उसे बुझाया गया, शबाना का शरीर करीब 95 प्रतिशत तक झुलस चुका था। उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत दुर्ग जिला अस्पताल और फिर वहां से रायपुर के विशेषज्ञ डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया। सात दिनों तक डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन संक्रमण और अत्यधिक जलन के कारण उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया। शुक्रवार को अस्पताल से आई उनकी मौत की खबर ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
शबाना निशा केवल एक आम नागरिक नहीं थीं, बल्कि वह दुर्ग की राजनीति में एक सक्रिय चेहरा थीं। वह दुर्ग नगर निगम चुनाव में वार्ड क्रमांक 28 से कांग्रेस की पार्षद प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतर चुकी थीं। उनकी राजनीतिक सक्रियता और समाज सेवा के कारण उनकी मौत का मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। विपक्षी दल और उनके समर्थक प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या बेदखली की कार्रवाई के दौरान संवेदनशीलता का परिचय नहीं दिया जा सकता था?
इस पूरे घटनाक्रम पर सिटी कोतवाली पुलिस का कहना है कि उनकी टीम केवल अदालत के आदेश का पालन करने के लिए वहां मौजूद थी। पुलिस का दावा है कि स्थिति अचानक बिगड़ी और महिला को आत्मघाती कदम उठाने से रोकने का मौका नहीं मिला। पुलिस के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया गया था। फिलहाल, पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है और अस्पताल से पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।यह घटना हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी कानूनी जीत मानवीय हार के रूप में सामने आती है। क्या संवाद के जरिए ऐसी दुखद घटनाओं को टाला जा सकता है? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
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