Surajpur news
Surajpur news:छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख देती है। एक नन्हा बालक, जिसने महज 24 घंटे पहले इस दुनिया में कदम रखा था, उसे अपनों के प्यार और मां के आंचल की जगह नफरत और मौत के साए में धकेल दिया गया। जिस उम्र में बच्चे को मखमली बिछौने पर होना चाहिए था, उसे कोई निष्ठुर व्यक्ति बोरी में भरकर ओड़गी पुलिस थाना क्षेत्र के बैजनाथपुर जंगल में कांटों के बीच लावारिस छोड़ गया। यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि ममता के नाम पर एक गहरा कलंक है, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है।
कहते हैं कि ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’, और इस मासूम के मामले में यह कहावत पूरी तरह सच साबित हुई। शनिवार दोपहर को जब कुछ ग्रामीण बैजनाथपुर के घने जंगल से गुजर रहे थे, तब उन्हें अचानक एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। सुनसान जंगल में नवजात की आवाज सुनकर ग्रामीण चौंक गए। जब वे आवाज की दिशा में बढ़े, तो देखा कि एक बोरी हिचकोले ले रही थी। बोरी खोलने पर अंदर एक नवजात कपड़ों में लिपटा हुआ मिला। बच्चे की हालत और उसकी बेबसी देखकर प्रत्यक्षदर्शियों की आंखें नम हो गईं।
ग्रामीणों ने बिना एक पल गंवाए मानवता का परिचय दिया और तुरंत पुलिस के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचित किया। सूचना मिलते ही भैयाथान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मेडिकल टीम एंबुलेंस लेकर मौके पर पहुंची। नवजात को प्राथमिक उपचार के लिए तत्काल अस्पताल ले जाया गया। ग्रामीणों और मितानिनों की इस सक्रियता ने बच्चे को एक नया जीवन दिया। ठंड और भूख से बेहाल उस नन्हीं जान को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिलने से उसकी सांसों की डोर टूटने से बच गई।
भैयाथान के खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि बच्चे का जन्म लगभग 24 घंटे पहले ही हुआ था। उन्होंने बताया कि नवजात का वजन 3.5 किलो है और वह फिलहाल पूरी तरह स्वस्थ है। डॉ. सिंह के अनुसार, “बच्चा खुशकिस्मत था कि ग्रामीणों ने उसे समय पर देख लिया। अगर थोड़ी भी और देर होती या किसी जंगली जानवर की नजर उस पर पड़ जाती, तो उसे बचाना नामुमकिन होता।” प्राथमिक उपचार और जरूरी कानूनी कागजी कार्रवाई (MLC) के बाद, बच्चे को बेहतर निगरानी के लिए जिला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास भेज दिया गया है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ओड़गी थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब उन तमाम पहलुओं की जांच कर रही है कि आखिर इस मासूम को जंगल में मौत के मुंह में क्यों धकेला गया। क्या यह कदम किसी सामाजिक लोकलाज के डर से उठाया गया, या इसके पीछे कोई गहरी मजबूरी थी? पुलिस आसपास के गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों और प्रसव रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि बच्चे को छोड़ने वाले व्यक्ति तक पहुँचा जा सके। महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम भी बच्चे के भविष्य और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी है।
सूरजपुर की यह घटना समाज में व्याप्त कुरीतियों और मानवीय मूल्यों के पतन की ओर इशारा करती है। जहां एक ओर लोग संतान के लिए दर-दर भटकते हैं, वहीं दूसरी ओर एक स्वस्थ और सुंदर बालक को इस तरह फेंक देना हृदयविदारक है। फिलहाल, वह मासूम अब सुरक्षित हाथों में है और प्रशासन उसकी पूरी देखभाल कर रहा है।
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