Durg Gutka Raid
Durg Gutka Raid: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध गुटखा कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। नंदिनी थाना क्षेत्र के बिरेभाठ गांव में संचालित हो रही एक गुप्त फैक्ट्री पर पुलिस और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने दबिश देकर लाखों रुपए का माल बरामद किया है। यह कार्रवाई इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि यह फैक्ट्री बाहर से पूरी तरह बंद नजर आती थी, लेकिन इसके भीतर अवैध निर्माण का बड़ा खेल चल रहा था।
मुखबिर की सटीक सूचना मिलने पर दुर्ग सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी के नेतृत्व में नंदिनी पुलिस, खाद्य सुरक्षा विभाग और जीएसटी (GST) विभाग की एक संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने बिरेभाठ गांव में सड़क किनारे स्थित एक संदिग्ध गोदाम पर छापा मारा। जांच के दौरान वहां तीन बड़ी पैकेजिंग मशीनें और भारी मात्रा में ‘मुसाफिर’ ब्रांड का पान मसाला और जर्दायुक्त गुटखा बरामद किया गया। पुलिस ने मौके से एक बड़ा ट्रक भी जब्त किया है, जिसका उपयोग माल की तस्करी के लिए किया जा रहा था।
फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिकों से पूछताछ में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। एक श्रमिक के अनुसार, वह वहां 5 अप्रैल से काम कर रहा है और हर दिन ट्रक के माध्यम से लगभग 20-21 बोरा गुटखा बाहर भेजा जाता था। बाजार मूल्य के अनुसार, एक बोरे की कीमत करीब 50 हजार रुपए है, जिसका अर्थ है कि प्रतिदिन 10 लाख रुपए का अवैध गुटखा सप्लाई किया जा रहा था। यदि इस पर 40 प्रतिशत की दर से जीएसटी की गणना की जाए, तो राज्य सरकार को हर दिन करीब 4 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा था।
इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री के असली मालिक की पहचान करना है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी जितेंद्र नेले के अनुसार, पकड़े गए ब्रांड के मालिक के पास किसी अन्य स्थान का लाइसेंस तो है, लेकिन उसने इस अवैध गोदाम से किसी भी तरह के संबंध होने से साफ इनकार कर दिया है। फैक्ट्री में मौजूद 13 श्रमिकों को हिरासत में लिया गया है, जो महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। इन श्रमिकों ने भी डर या वफादारी के कारण मालिक का नाम बताने से परहेज किया है, जिससे जांच की दिशा फिलहाल उलझी हुई नजर आ रही है।
दुर्ग जिले में अवैध गुटखा फैक्ट्रियों पर यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है, अब तक ऐसी 7-8 रेड हो चुकी हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के बीच साक्ष्यों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। पूर्व में हुई कार्यवाहियों का रिकॉर्ड देखें तो सील किए गए गोदामों से सामान चोरी होने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे अदालत में आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं टिक पाते। फिलहाल, प्रशासन ने नमूने (Samples) लैब में जांच के लिए भेज दिए हैं और परिसर को सील करने की तैयारी की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध व्यापार को चलाने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया गया था। गुटखे के पैकेटों को बारदानों के पीछे छिपाकर भेजा जाता था ताकि सड़क पर चेकिंग के दौरान किसी को शक न हो। पुलिस अब उन रूटों और नेटवर्क की तलाश कर रही है जहां यह माल खपाया जा रहा था। सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने आश्वस्त किया है कि इस संगठित अपराध के पीछे जो भी बड़े चेहरे हैं, उन्हें जल्द ही बेनकाब कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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